अब तक नगर निकायों के अध्यक्ष पार्षदों के जरिए चुने जाते थे। जिसे अप्रत्यक्ष चुनाव व्यवस्था कहा जाता है। इस पर लगातार विरोध हो रहा था और जनता की भी मांग थी कि अध्यक्ष को वही चुनें। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से लोकतंत्र और मजबूत होगा और जनता का विश्वास बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि “यह निर्णय जनता की भावनाओं के अनुरूप है। अब नगर निकायों का नेतृत्व सीधे जनता तय करेगी। इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।”
राज्य सरकार का यह फैसला वर्ष 2027 में होने वाले निकाय चुनावों से लागू होगा। इसके बाद नगर पालिका और परिषदों में अध्यक्ष वही बनेगा जिसे जनता का सीधा बहुमत मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस अध्यादेश से स्थानीय राजनीति में बड़ी हलचल होगी, क्योंकि अब नेताओं को सीधे जनता से जुड़ना होगा। वहीं व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।

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