मां ने मजदूरी कर पढ़ाया, बेटा बनेगा डॉक्टर, बोला- पैसे नहीं थे, भाई ने अपना सपना मारकर मुझे पढ़ाया

कोटा संभाग के एक छोटे से गांव भाड़सूई के रहने वाले मोनू मीणा ने NEET 2025 में 748वीं रैंक हासिल की थी। अब वह सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS करेगा। पिता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। मां ने मजदूरी कर पालन-पोषण किया। इस गांव की आबादी महज़ 600–700 है।

बीमारी के चलते पिता का निधन, मां ने की मजदूरी

मोनू मीणा ने बताया- 2011 में पिता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उस वक्त में बहुत छोटा था। परिवार की सारी जिम्मेदारी मां कलावंती बाई पर आ गई। तब मां भी एक छोटे से खेत में काम करके परिवार चलाती थीं। मेरी मां की आंखों में हम दोनों भाइयों को पढ़ाने की एक जिद हमेशा रही है।

बड़ा भाई अजय मीणा भी बायोलॉजी से 12वीं पास था और डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन जब घर की स्थिति सही नहीं थी कि दोनों बेटों को कोचिंग कराई जा सके, तो बड़े भाई अजय ने चुपचाप अपने सपने को मोनू के नाम कर दिया। खुद B.Sc. करने लगा, ताकि छोटे भाई का सपना पूरा हो सके।

मोनू ने 10वीं में 91.50% अंक लाकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी थी। लेकिन जब कोचिंग की बात आई, तो आर्थिक स्थिति एक बड़ी दीवार थी। ऐसे में मोनू की मां ने कोटा में नीट की कोचिंग से संपर्क किया। वहां उन्हें बताया गया कि राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना जैसे छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत मोनू को बिना किसी शुल्क के 2 सालों तक कोचिंग और रहने–खाने की सुविधा मिल सकती है। आवेदन किया और अच्छे अंकों के आधार पर चयनित भी हो गया।

माध्यम नहीं, मेहनत मायने रखती

मोनू ने बताया- लोग कहते हैं हिंदी मीडियम से सफल होना मुश्किल है, मैं भी यही सोचता था। लेकिन जब NV सर से मिला तो मेरी सोच की दिशा ही बदल गई। उन्होंने कहा, ‘माध्यम नहीं, मेहनत मायने रखती है।’ और तब मैंने ठान लिया कि अब मैं दोगुनी मेहनत करूंगा। कोचिंग में हिंदी स्टडी मटेरियल, टेस्ट सीरीज़, डाउट काउंटर जैसी हर सुविधा दी। वहां के शिक्षकों ने कभी ये महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी निजी स्कूल या अंग्रेज़ी मीडियम का छात्र नहीं है। उन्होंने मुझे मेरी भाषा में सीखने का हक़ दिया और यही मेरी ताक़त बन गई।

मोनू ने बताया कि मेहनत रंग लाई NEET 2025 में 748वीं रैंक पाई और अब में डॉक्टर बनने जा रहा हु। लेकिन मेरे लिए ये सिर्फ एक पेशा नहीं ये मेरी मां के आंसुओं और भाई के त्याग का प्रतिफल है। आज अगर मैं यहां पर हूं तो सिर्फ इसलिए कि मेरी मां ने हार नहीं मानी। मेरे भाई ने अपने सपने मुझे दे दिए। और कोटा ने मुझे ऐसा मंच दिया जहां मैंने उड़ना सीखा।

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