कपिल चौहान | भवानीमंडी: नगर की पहचान को अपने हुनर से गढ़ने वाले कलाकारों की कड़ी एक-एक कर टूटती जा रही है। इसी क्रम में प्रसिद्ध पेंटर रामकिशन वर्मा का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
भवानीमंडी नगर के लिए वर्मा परिवार का योगदान सर्वविदित है। नारायण पटेल, इंदर पहलवान, पेंटर रामकिशन वर्मा, अशोक वर्मा और दूसरी पीढ़ी में रेल यूनियन नेता चम्पा वर्मा, पूर्व नपा अध्यक्ष राजीव वर्मा (राजू भाई), नपा उपाध्यक्ष अनिल मीणा तक यह विरासत चली आ रही है।
पेंटर रामकिशन वर्मा अपनी अद्भुत कलाकृतियों और खासकर Portrait कला में माहिर थे। किसी भी शक्ल-सूरत को हूबहू कैनवास पर उतार देने की उनकी विलक्षण क्षमता नगरवासियों को आज भी याद है। स्कूल के दिनों से ही उनकी बनाई पेंटिंग्स और कलाकृतियाँ बच्चों और युवाओं को प्रभावित करती रही हैं। कलात्मक उत्कर्ष के बावजूद उनकी सहज सादगी हर किसी को चकित कर देती थी। जीवन में बड़ी ऊँचाइयों को छूने के बावजूद वर्मा साहब ने कभी भी अपनी कला को अपने व्यवहार और आचरण पर हावी नहीं होने दिया। नगरवासियों का कहना है कि दुर्भाग्य यह रहा कि इतनी बड़ी प्रतिभा को भवानीमंडी जैसी छोटी जगह में रहते हुए वह मंच और विस्तार नहीं मिल पाया, जिसके वह हकदार थे। भवानीमंडी के कला जगत में उनके अवसान से जो शून्य पैदा हुआ है, उसकी भरपाई संभव नहीं है।

Post a Comment