अचानक क्यों हुआ ये बदलाव?
सूत्रों के मुताबिक, इस नियुक्ति को उज्जैन संभाग में लगातार बढ़ रहे पर्यावरण संबंधी मुद्दों और मौजूदा व्यवस्था में अपेक्षित गति की कमी के कारण एक सख्त कदम माना जा रहा है। हटवाल की नियुक्ति को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि परिषद अब उज्जैन में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
हटवाल के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?
यह पद संभालते ही कमल के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ खड़ी होंगी। उन्हें न केवल पर्यावरण संरक्षण के नियमों को सख्ती से लागू करना होगा, बल्कि उन सभी दबावों का भी सामना करना पड़ेगा जो इस क्षेत्र में काम करने के दौरान अक्सर सामने आते हैं। परिषद के चेयरमैन हीरालाल पाटीदार ने अपनी ओर से हटवाल को इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि हटवाल अपनी 'निष्ठा, समर्पण और पारदर्शिता' से एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। हालांकि, इस अचानक हुई नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएगा


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