अवैध खनन: चौकी के सामने से निकल रही ट्रॉलियां, अधिकारी सिर्फ बयान दे रहे एसडीएम बोले माइनिंग को फोन लगाइए… माइनिंग वाले ने फोन उठाया ही नहीं

कपिल चौहान । भैसोदामंडी : राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्रों में खेतों व सरकारी भूमि की अंधाधुंध खुदाई जारी है। जेसीबी मशीनें, पम्प थ्रेसर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर सबकुछ खुले मैदान में दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की बोलते हुवे बताया कि प्रतिदिन 10–12 ट्रॉलियां, 3–4 डंपर और कई पम्प थ्रेसर मशीनें रेत निकालने में लगी रहती हैं। रोजाना 20–25 ट्रॉलियां रेत लेकर बिना रोक-टोक गांवों से बाहर निकल जाती हैं। अवैध रेत 2600 से 3200 रुपये प्रति ट्रॉली में धड़ल्ले से बेची जा रही है। निजी निर्माण ही नहीं, सरकारी कामों तक में यह रेत पहुंच रही है।

अधिकारियों के बयान सिर्फ खानापूर्ति

जब एसडीएम गरोठ राहुल चौहान से अवैध खनन पर सवाल पूछा तो उन्होंने “दिखवाने” की बात बोली। अधिक सवाल पूछने पर वे खुद कार्रवाई करने की बजाय माइनिंग अधिकारी को फोन करने की सलाह देने लगे। आश्चर्य की बात यह कि माइनिंग अधिकारी ने फोन उठाना ही जरूरी नहीं समझा। इधर, स्थानीय चौकी प्रभारी बलवीर सिंह यादव कह रहे कि हमारा जो काम है, हम जरूर करेंगे। लेकिन पुलिस चौकी के सामने से ही बिना नम्बर प्लेट के रेत से भरे वाहन रोजाना पार हो रहे हैं।

अवैध खनन बना ‘रोजगार मॉडल', 1 लाख का टर्नओवर

रेत निकालने वालो ने अवैध खनन को रोजगार का नया जरिया बना दिया है। जेसीबी चालक को 500 रुपये रोज, मजदूर को 400 रुपये रोज और ट्रेक्टर-डंपर मालिकों के लिए मोटी कमाई। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि चौकी, आंकी और सेमली गांवों के आसपास रोजाना करीब 50 ट्रैक्टर-ट्राली रेत से भरी निकलती हैं। सिर्फ इन तीन गांवों से ही प्रतिदिन 1 लाख रुपये से अधिक का अवैध कारोबार हो रहा है। जितना रेत निकाली जा रही है, उससे कहीं अधिक सरकार के राजस्व को चपत लग रही है।

खनन के वीडियो और वाहन नम्बर

अतुल्य भारत के पास उन जेसीबी और ट्रॉली-डंपरों के वाहन नम्बर और वीडियो फुटेज मौजूद हैं, जिनसे अवैध खुदाई की जा रही है। कुछ ट्रॉलियां तो बिना नम्बर के ही दौड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद पुलिस, प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों, बैठकों और बयानों तक सीमित है।

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