खुले तो खुल गई पोल: नए सुलभ शौचालयों के दरवाजे टूटे, पानी भी नदारद, स्वच्छता के स्लोगन बाहर, अंदर बदहाली की कहानी, आधा करोड़ खर्च, फिर भी सुविधाघर बने कबाड़घर

खुले तो खुल गई पोल: उद्घाटन के कुछ ही दिनों में टूटे सुलभ शौचालय, आधा करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल हालत

भैसोदामंडी। कपिल चौहान : नगर परिषद द्वारा स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए सुलभ शौचालय उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बदहाल नजर आने लगे हैं। करीब 50 मीटर की दूरी पर नगर परिषद प्रांगण के पास बने सुलभ शौचालयों में दरवाजे टूटे पड़े हैं, कई जगह दरवाजों के कब्जे निकल गए हैं तो कहीं पूरे दरवाजे ही अलग हो गए हैं।
स्नानघरों में फव्वारे लगाने के लिए वाल्व तो लगाए गए हैं, लेकिन फव्वारे ही गायब हैं। कई नलों में पानी नहीं आ रहा है, जिससे ये सुविधाघर कम और कबाड़ ज्यादा नजर आ रहे हैं।
चित्र: भैसोदा नगर परिषद परिसर के बगल में बने सुलभ शौचालय में टूटे पड़े दरवाजे
दरअसल, नगर परिषद ने करीब आधा करोड़ रुपए खर्च कर कुल 9 सुविधाघरों का निर्माण कराया था, जिनमें 7 सामुदायिक और 2 सुलभ शौचालय शामिल हैं। इनका निर्माण लगभग दो वर्ष पहले किया गया था, लेकिन ये लंबे समय तक बंद ही पड़े रहे। हाल ही में अतुल्य भारत न्यूज़ में खबर प्रकाशित होने के बाद इन्हें बिना किसी औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम के खोल दिया गया। लेकिन खुलने के कुछ ही दिनों में इनकी वास्तविक स्थिति सामने आ गई।
निर्माण की खराब गुणवत्ता साफ दिखाई दे रही है। कहीं टाइलें उखड़ रही हैं तो कहीं दरवाजों की घटिया गुणवत्ता के कारण वे टूट चुके हैं। नगर परिषद कार्यालय के प्रवेश द्वार के पास बने शौचालयों की छत पर सरकारी धन से सोलर पैनल भी लगाए गए हैं, लेकिन इनमें न तो बिजली की व्यवस्था है और न ही बल्ब लगे हैं।
इधर, नगर परिषद स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के तहत शहर में दीवारों पर स्वच्छता से जुड़े बड़े-बड़े स्लोगन लिखवाकर प्रचार-प्रसार कर रही है। लेकिन जिन शौचालयों की दीवारों पर स्वच्छता के संदेश लिखे गए हैं, उनके अंदर की स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। रेलिंग और दरवाजों में जंग लग चुकी है और कई जगह नींव तक उखड़ती दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि इन सुविधाघरों का निर्माण गरोठ विधानसभा क्षेत्र की ठेका फर्म देवश्री कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया गया था। इनकी देखरेख के लिए अलग से कर्मचारी लगाकर हर माह हजारों रुपए का भुगतान भी किया जा रहा है, इसके बावजूद सुविधाघरों की यह हालत सवाल खड़े कर रही है। इससे साफ है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद शौचालय अब सरकारी धन के दुरुपयोग के साक्षी बनते नजर आ रहे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

     मैं इंजीनियर से बोलकर शौचालयों की स्थिति दिखवाता हूं।

-अजय पौराणिक, नप अध्यक्ष प्रतिनिधि

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