आदर्श कुमार जांगड़े ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को अपने संस्कारों और परंपराओं से जोड़ते हैं। बुज़ुर्गों का सम्मान हमारी संस्कृति की पहचान है। अधिवक्ता विनोद माली ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी को उनके सम्मान और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। पं. डॉ. शिव शक्तिलाल शर्मा आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलीप नलगे ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि वृद्धावस्था जीवन का अंत नहीं, बल्कि अनुभव, परिपक्वता और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का समय है। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, मानसिक शांति एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष जोर दिया।
प्राचार्य बसंती धीन्धा ने कहा कि बुज़ुर्गों को केवल शारीरिक देखभाल ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग और सम्मान की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने सेवा भाव को सच्ची मानवता की पहचान बताया। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताते हुए कहा कि यह आत्मा को शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। उनके मार्गदर्शन में सभी ने ध्यान का अभ्यास कर गहन शांति का अनुभव किया। ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने कहा कि आध्यात्मिकता जीवन के हर चरण को सुंदर और संतुलित बनाती है। उन्होंने बुज़ुर्गों के अनुभवों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। ब्रह्माकुमारी आरती दीदी ने कहा कि वृद्धावस्था आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने का श्रेष्ठ समय है। यदि परिवार में बुज़ुर्गों को सम्मान और प्रेम दिया जाए, तो घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
कार्यक्रम का संचालन एवं समापन कार्यक्रम का सुंदर एवं प्रभावशाली संचालन ब्रह्माकुमारी साक्षी दीदी द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सहज, भावपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया।



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