झालावाड: खानपुर क्षेत्र के बिशनखेडी ग्राम पंचायत में सरकारी धन को खुले हाथों से लूटा जा रहा है, जिसकी गवाही बिशनखेडी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का परिसर दे रहा है। यहां ग्राम पंचायत की ओर 3 लाख 84 हजार रूपए खर्च कर न्यूट्रीगार्डन विकसित किया गया है। लेकिन ये गार्डन कागजों में उगा दिया गया, हकीकत में ऐसा कोई गार्डन परिसर में लगा ही नही। पंचायती राज विभाग के डिजिटल दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत की ओर से सन 2021-22 के दौरान न्यूट्री गार्डन लगाया गया है। जो बिशनखेडी गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगाया है जिस पर ग्राम पंचायत ने 3 लाख 84 हजार रूपए खर्च किए है। वर्क कोड संख्या 21-22 122895 से हुए इस काम की हकीकत यह है कि विद्यालय परिसर में इस तरह का कोई गार्डन नहीं उगाया गया। परिसर में रूटीन के पेड पौधे उगे हुए है। विद्यालय में तैनान शिक्षकों ने बताया कि गत सालों में परिसर में ऐसे किसी गार्डन का निर्माण नहीं किया गया और राशि उठा ली गई।
क्या है न्यूट्रिशियन गार्डन
केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से इस अवधारणा को रखा गया जिसके आधार पर प्रत्येक स्कूल में खाली पडी जमीन पर ऐसे गार्डन विकसित करने के निेर्दश दिए गए थे। इसे पोषण उद्यान भी कहा जा सकता है जिसमें स्कूल के शिक्षक और बच्चे मिलकर सब्जियां उगाने का काम करेंगे। यहां उगने वाली सब्जियों से बच्चों को मिड डे मील में पोषक आहार मिलेगा वहीं सब्जियां उगाने की प्रक्रिया से बच्चों को बोटनी और उद्यानिकी का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। लेकिन अफसोस यहा है कि बिशनखेडी पंचायत के इस स्कूल का न्यूट्रीशियन भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पेट में जा चुका है।
पुराने टॉयलेट को पोतकर बना दिया पिंक टॉयलेट
स्वच्छ भारत अभियान के तहत चुनिंदा विद्यालयों में बालिकाओं के लिए पिंक टॉयलेट का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह के टॉयलेट का निर्माण बिशनखेडी विद्यालय में किया जाना था। लेकिन ग्राम पंचायत ने यहां स्थित पुराने टॉयलेट में कुछ टाइल्स लगाकर पुताई करवा दी। जिसमें महज 10-15 हजार रूपए से ज्यादा खर्च नहीं हुए होंगे। जबकि इसका बजट 75 हजार रूपए बताया जा रहा है।
जर्जर हो गया आंगनबाडी भवनबिशनखेडी के राजकीय उच्च माध्यामिक विद्यालय परिसर में ही आंगनबाडी संचालित हो रही है। जिसका भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस भवन की दीवारों में कई जगह दरारें आ गई है जिससे बारिश के मौसम में गिरने का खतरा बना हुआ है। ग्राम वासियों ने बताया कि इस भवन को बने महज 20 साल हुए है। घटिया सामग्री का उपयोग करने के कारण बीस साल में भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी बच्चों और आंगनबाडी कर्मियों के लिए खतरा साबित हो सकता है।
"पिंक टॉयलेट के लिए 75 हजार रूपए की स्वीकृति हुई है। बिशनखेडी में पहले से टॉयलेट बना था इसलिए उसकी मरम्मत कर दी। नया नहीं बनाया।"
कनिष्ठ अभियंता, खानपुर पंचायत समिति



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