कोटा: महाशिवरात्रि के पर्व पर शहर के शिवालयों में पूजा-अर्चना का दौर सुबह से शुरू हो गया। शहर में कई जगह मेले लगेंगे है। शिव बारात निकाली गई है। भंडारों का आयोजन हो रहा है ऐसे में महाशिवरात्रि पर शहर भर में शिव मंदिरों में सुबह से ही शिवालयों में अभिषेक शुरू हो गया है। आज सुबह से भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है।
देश का एक मात्र 525 शिवलिंग: कोटा के थेगड़ा इलाके में देश का एकमात्र स्थान शिवपुरी धाम जहां 525 शिवलिंग एक साथ स्वास्तिक आकार में स्थापित हैं। यहां आज अलसुबह से भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है। श्रद्धालु शिवलिंग पर एक लोटा जल, दूध, चंदन, घी शहद से अभिषेक कर रहे हैं। पूरा शिवालय ओम नमः शिवाय के जय कारों से गूंज रहा है। 525 शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्तों को 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त होता है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के बाद, कोटा के थेगड़ा शिवपुरी धाम वह स्थान है, जहां भक्त इतनी बड़ी संख्या में शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सकते है, दर्शन कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सूर्य की पहली किरण करती है मस्तकाभिषेक: कोटा में प्राचीन शिव मंदिर कंसुआ धाम के गर्भ गृह में मौजूद शिवलिंग पर सूर्य की पहली किरण मस्तकाभिषेक करती है। दंत कथाओं के अनुसार यह मंदिर करीब 1400 साल पुराना है। कंसुआ धाम कण्व ऋषि की तपोस्थली रही है। राजकुमार दुष्यंत और शकुंतला का गंधर्व विवाह भी यही हुआ है। उनके बेटे भरत का बचपन भी यही गुजरा है।
मंदिर के पास मौजूद कुंड में पूरे 12 महीने पानी भरा रहता है जो कभी सूखता नही है। इस कुंड की मान्यता है कि कुंड में नहाने से चर्म रोग दूर होते हैं। शिवरात्रि पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते है। यहां दो दिन मेला भी लगता है।
पुजारी श्याम गिरी गोस्वामी ने बताया कि मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 738 ईस्वी में हुआ था। इस धाम में शिव परिवार विराजमान है। गर्भ गृह में मौजूद शिवलिंग पर सूर्य की पहली किरण प्रत्येक दिन अभिषेक करती है। यहां अखंड ज्योति प्रज्वलित है वहीं धुणी जलती रहती है।
मंदिर के बाहर 5 फीट लंबा सहस्त्र शिवलिंग मौजूद है। मंदिर में एक दुर्लभ शिलालेख भी मौजूद है जो कि कौटिल्य लिपि में लिखा हुआ है जो कि देश के सर्वश्रेष्ठ शिलालेखों में से एक माना जाता है।
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