मध्यप्रदेश के मन्दसौर जिले की रहने वाली नेहा मालवीय की डिलेवरी भवानीमंडी के नून हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रेखा वर्मा द्वारा की गई। मरीज की सिजेरियन डिलेवरी के बाद प्लासेन्टा मेम्ब्रेन का प्रयोग ड्रेसिंग के लिये किया। इसको लेकर डॉ. रेखा वर्मा ने कहा कि ड्रेसिंग में इसका प्रयोग मील का पत्थर साबित हो सकता है। डॉ. वर्मा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद सामान्यतया ड्रेसिंग में माईक्रो पेड और बेन्डेज का प्रयोग किया जाता है, पर इन्फेक्शन का चांस भी रहता है। इसके प्रयोग से मरीज 7-8 दिन में रिकवर होता है। साथ ही ड्रेसिंग में माईक्रो पेड और बेन्डेज के प्रयोग में खर्च भी अधिक आता है।
फिर इसके निस्तारण करने से भी कई प्रकार के प्रदुषण होते है। जबकी सिजेरियन डिलेवरी के बाद प्लासेन्टा मेम्ब्रेन का प्रयोग ड्रेसिंग में करने पर 2-3 दिन में ही घाव पूरी तरह भर जाता है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। साथ ही इसमें कोई खर्च भी नही होता। प्लेसेन्टा मेम्बरेन में स्टेम सेल होती है, जो घाव भरने में सहायक होती है। जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक होती है। इसके बायोमेडिकल वेस्ट का खर्च नहीं होता। सिजेरियन ड्रेसिंग के अलावा प्लासेन्टा मेम्बरेन का प्रयोग डायबेटिक, हेपेटायटिस एवं संक्रमण के मरीजो के ऑपरेशन में भी किया जा सकता है।
यूरोपियन देशों में हजारों ऑपरेशन, भारत में पेटेंट के लिए प्रयासरत
डॉ. वर्मा ने यूरोपियन देशो में 3- 4 हजार ऑपरेशन में प्लासेन्टा मेम्बर का सफल प्रयोग किया है और भारत में भी इसका पेटेंट करवाकर प्रयोग के लिए प्रयासरत है। जब इस बारे में मरीज और उनके परिजनों से बात की गई, तो बताया कि यह बहुत अच्छा अनुभव रहा। सिजेरियन डिलेवरी के बाद 2-3 दिन में ही घाव भर गया और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
"नून हॉस्पिटल के मेनेजिंग डायरेक्टर रजत अरोड़ा बताते है कि यह एनवायरमेंट फ्रेण्डली ड्रेसिंग है। जिसके लिए नून हॉस्पिटल एक उदाहरण पेश कर रहा है।"
आपको बता दे कि इस तरह की चिकित्सा विधि स्वास्थ्य के साथ- साथ पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र भी एक बड़ी उपलब्धि है। जो मरीजों के साथ- साथ देश की अर्थ व्यवस्था में भी सहायक सिद्ध होगी।

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