इंदौर की इंटरनेशनल पैरा एथलीट पूजा गर्ग (37) का नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल हुआ है। पूजा की कैंसर की जर्नी के लिए 4 दिन पहले ही उनको ये सम्मान मिला है।
पूजा ने 7 नवंबर को 'वर्ल्ड कैंसर डे' पर यह रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने इंदौर से सिक्किम के नाथू-ला पास तक 4500 किमी की कैंसर अवेयरनेस यात्रा पूरी की। पूजा ने फोर व्हीलर बाइक से 17 दिनों में यहां यात्रा पूरी कर 14,400 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उन्हें सम्मानित किया।
2010 में मैं 22 साल की थी। तब घर में सीढ़ियों से गिर गई थी। इसमें मेरी स्पाइन डैमेज हो गई थी। सर्जरी कर एल-1 और टी-12 पर पेडिकल स्क्रू डाले गए हैं। डॉक्टरों ने माता-पिता से यह तक कह दिया था कि मैं कभी व्हीलचेयर से उठ नहीं पाऊंगी। 4 साल तक मुझे कैथेटर (मूत्राशय संबंधी नली) लगी थी। लंबे इलाज के दौरान मेरी स्पाइन, पेट, पैर, गले आदि की 13 सर्जरी इंदौर, अहमदाबाद और दिल्ली में हुई है।
मुझे बीते सालों में 10 हजार से ज्यादा इंजेक्शन लगे हैं। इलाज के दौरान ऐसा कोई रंग नहीं बचा, जिस रंग की गोली मैंने न खाई हो। स्पाइनल डैमेज का वर्ल्ड में कोई इलाज नहीं है। मेरे दोनों पैरों में सेंसेशन नहीं है। कुछेक देशों में स्टेम्स सेल से इसका इलाज किया जा रहा है, लेकिन अभी सफल नहीं है।
मेरा मानना था कि जिंदगी यहां रुक नहीं सकती। फिर पिछले साल मुझे बोन कैंसर डायग्नोस हुआ है। लेकिन मैं टूटी नहीं। मुझे बेड पर महसूस हुआ कि मुझे ऐसा मुकाम हासिल करना है, जो मेरे लिए और मेरे जैसे ऐसे अन्य लोगों के लिए मिशन हो। इसलिए कैंसर से लड़ी और जीती भी। स्पोर्टस की ओर रुख किया। अब मैं मेरे जैसे ही कैंसर मरीजों के लिए आगे आई हूं।
17 दिन में हर रोज औसतन 200 किमी की यात्रा की। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई बार 100 किमी प्रति दिन की यात्रा भी की। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी से परेशानी भी हुई। लंबे सफर से पैरों में सूजन आ गई थी। कई बार लगता था कि यात्रा पूरी कर पाऊंगी या नहीं।
हादसे के 7 साल बाद पकड़ी भरोसे की रफ्तार पूजा के परिवार में माता-पिता और दो छोटी बहनें हैं। हादसे से पहले ही पूजा का बीई कम्प्लीट हुआ था। हादसे के 7 साल बाद वह स्पोर्ट्स के लिए एक्टिव हुईं। इस बीच 2022 में पिता दिनेश कुमार गर्ग का निधन हो गया। दोनों बहनों अर्चना और इतिश्री की शादी हो चुकी है। दोनों पैरों में सेंसेशन नहीं होने के बावजूद पूजा अपनी अधिकांश दिनचर्या खुद ही करती हैं। मां रेखा गर्ग का भी सहयोग रहता है।
पिछले साल डायग्नोस हुआ बोन कैंसर स्पाइनल इंजरी के बाद 2024 में पूजा को बोन कैंसर डायग्नोस हुआ। यह अभी पहली पहली स्टेज पर है। पूजा का कहना है कि नियमित ट्रीटमेंट के कारण काफी अच्छी रिकवरी है। वह इसके लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल फॉलो कर रही हैं। पूजा का कहना है कि कैंसर पेशेंट को मन में यह नहीं लाना चाहिए कि मैं कैंसरग्रस्त हूं। अब तक हर तरह के कैंसर की बीमारी का इलाज संभव है। ऐसे में हौसला रखना चाहिए।
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