समारोह में वक्ताओं ने बताया कि इंग्लैंड में जन्मे महाराजा हरिश्चंद्र सिंह ने शिक्षा इंग्लैंड व भारत दोनों जगह से प्राप्त की। 1943 में झालावाड़ के नरेश बने और स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले राजस्थान में अपनी रियासत का विलय किया। दिल्ली में नेहरू और सरदार पटेल तक उनसे प्रभावित हुए।
पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए उन्होंने जिले को पुल-पुलिया, सड़कों, गढ़ भवन, मदन विलास कोठी, भवानी क्रिकेट ग्राउंड और पाटन लाइब्रेरी जैसी अमूल्य सौगातें दीं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना उनका विशेष लक्ष्य था। कार्यक्रम में उनके पोते राजराणा चंद्रजीत सिंह ने दादा की यादें साझा कीं और जनता से गहरे जुड़ाव को याद किया। इसी बीच मंच से आवाज उठी कि अब राजराणा भी सक्रिय राजनीति में आएं।
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झालरापाटन में आयोजित महाराजा हरिश्चंद्र सिंह की 105वीं जयंती समारोह में शामिल लोग और मंच पर बैठे अतिथि। |
कांग्रेस विधायक सुरेश गुर्जर ने मंच से घोषणा की— “अगर राजराणा राजनीति में आते हैं तो मैं खानपुर सीट छोड़ने को तैयार हूं।




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