वहीं, केले बेच रहे एक ठेले वाले ने अतुल्य भारत को नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि इस तरह के केले उनको मार्केट रेट से कम में फ्रूट व्यापारी उपलब्ध करवा देते है। जो बाजार मूल्य से 30% कम में आसानी से मिल जाते है। उनको विक्रेता बाजार मूल्य से 10% कम में बेचकर 20% का मुनाफा कमाते है। पर इस थोड़े से मुनाफाखोरी के चक्कर में फल विक्रेता आमजन के स्वास्थ्य से बड़ा खिलवाड़ कर रहे है।
वही, व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट में देरी के कारण केले जल्दी खराब हो रहे हैं। स्टोरेज की सही व्यवस्था न होने से समस्या और बढ़ गई है। जबकि सही बात तो यह है कि यह सब खेल मुनाफाखोरी के चलते चल रहा है। जो लोगो से स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार है।
विशेषज्ञों की राय
फूड एक्सपर्ट्स का कहना है कि केले जैसे जल्दी पकने वाले फलों को ठंडे तापमान और नियंत्रित वातावरण में रखना ज़रूरी है। ऐसा न होने पर न सिर्फ़ फल बर्बाद होते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

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