केले बने ग्राहकों के लिए सिरदर्द, मंडी में ताज़गी के नाम पर मिल रहे सड़े फल, उपभोक्ताओं में नाराज़गी

भवानीमंडी: नगर की सब्जीमंडी में इन दिनों केले ग्राहकों की झोली में कम और उनकी परेशानी में ज़्यादा इज़ाफ़ा कर रहे हैं। कृत्रिम रूप से पकाए गए केले सड़ने लगे हैं। दुकानों और ठेलों पर बिक रहे इन केलों पर काले धब्बे और गलन साफ़ दिखाई दे रही है। ग्राहकों ने आरोप लगाया कि व्यापारी ताज़ा और सड़े केले एक साथ रखकर बेच रहे हैं। एक खरीददार ने कहा कि "हम पैसा ताज़ा फलों के लिए देते हैं, लेकिन घर ले जाकर आधे केले फेंकने पड़ते है।"

वहीं, केले बेच रहे एक ठेले वाले ने अतुल्य भारत को नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि इस तरह के केले उनको मार्केट रेट से कम में फ्रूट व्यापारी उपलब्ध करवा देते है। जो बाजार मूल्य से 30% कम में आसानी से मिल जाते है। उनको विक्रेता बाजार मूल्य से 10% कम में बेचकर 20% का मुनाफा कमाते है। पर इस थोड़े से मुनाफाखोरी के चक्कर में फल विक्रेता आमजन के स्वास्थ्य से बड़ा खिलवाड़ कर  रहे है।

वही, व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट में देरी के कारण केले जल्दी खराब हो रहे हैं। स्टोरेज की सही व्यवस्था न होने से समस्या और बढ़ गई है। जबकि सही बात तो यह है कि यह सब खेल मुनाफाखोरी के चलते चल रहा है। जो लोगो से स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार है।

विशेषज्ञों की राय

फूड एक्सपर्ट्स का कहना है कि केले जैसे जल्दी पकने वाले फलों को ठंडे तापमान और नियंत्रित वातावरण में रखना ज़रूरी है। ऐसा न होने पर न सिर्फ़ फल बर्बाद होते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

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