झालरापाटन । नगर में रविवार सुबह भगवान द्वारिकाधीश की साढ़े तीन कोसी परिक्रमा यात्रा परंपरा, आस्था और उत्साह के साथ भव्य रूप में संपन्न हुई। खराब मौसम और कम तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा। हजारों की संख्या में भक्त भजनों की धुन पर नाचते-गाते, जयकारे लगाते हुए करीब 10 किलोमीटर की परिक्रमा यात्रा में शामिल हुए। पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में रंगा नजर आया और हर गली-मोहल्ले में “जय द्वारिकाधीश” के जयघोष गूंजते रहे।
परिक्रमा की शुरुआत सुबह 7:30 बजे द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण में परंपरागत नौबत बाजा बजने के साथ हुई। जैसे ही नौबत की स्वर-लहरियां गूंजीं, श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सबसे आगे ढोल-नगाड़ों, शहनाइयों और बाजों के साथ भगवान द्वारिकाधीश की भव्य झांकी निकली। झांकी के साथ दूध की धार बहती रही, जो परंपरा और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। झांकी के पीछे भजनों पर झूमती महिलाएं, युवक-युवतियां और बच्चों का विशाल रैला था, जिसने परिक्रमा को उत्सव का रूप दे दिया। परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। ठंड और कभी-कभी हल्की बूंदाबांदी के बावजूद भक्त पूरे जोश के साथ चलते रहे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन गाती हुई नजर आईं, वहीं युवा ढोल की थाप पर नृत्य करते दिखे। छोटे-छोटे बच्चे भी हाथों में झंडे और पताकाएं लेकर माता-पिता के साथ परिक्रमा करते हुए दिखाई दिए। हर आयु वर्ग के लोगों की सहभागिता ने इस धार्मिक आयोजन को और भी विशेष बना दिया। द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण से शुरू हुई परिक्रमा पीपली बाजार, नगर पालिका क्षेत्र, गिंदौर गेट, सूरजपोल गेट, सेठों का चौराहा, पुरानी सब्जी मंडी और सूर्य मंदिर से होती हुई इमली गेट के रास्ते शहर के बाहर निकली। इसके बाद यात्रा उम्मेदपुरा गांव, कपासियां कुआं, रलायती गांव, वसुंधरा कॉलोनी और विवेकानंद सर्किल से गुजरते हुए पुनः द्वारिकाधीश मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें और भक्ति संगीत की गूंज बनी रही। परिक्रमा मार्ग के दोनों ओर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया गया। कई स्थानों पर चाय, दूध, शरबत, पानी और हल्के नाश्ते की व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। सामाजिक संगठनों के इस सहयोग की श्रद्धालुओं ने सराहना की।
करीब 10 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग को तय करने में श्रद्धालुओं को लगभग 5 घंटे का समय लगा। इसके बावजूद थकान के बजाय भक्तों के चेहरों पर संतोष और आनंद दिखाई दिया। मंदिर लौटते समय भी भजनों और जयकारों का सिलसिला जारी रहा। परिक्रमा के समापन पर द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण में विशेष आरती और प्रसाद वितरण किया गया। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद मंदिर समिति की ओर से कूपन प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी कराई गई। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर समिति के प्रवक्ता रवि पाटीदार ने बताया कि आयोजन के लिए लगभग 20 हजार भोजन पैकेट तैयार कराए गए थे। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने पर अतिरिक्त पैकेट भी बनवाए गए, ताकि किसी को प्रसादी से वंचित न रहना पड़े।
प्रशासन और मंदिर समिति के बीच समन्वय के चलते सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाएं भी सुचारू रहीं। पुलिस बल और स्वयंसेवकों ने पूरे मार्ग पर निगरानी रखी, जिससे परिक्रमा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकी। कहीं भी अव्यवस्था या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि द्वारिकाधीश की साढ़े तीन कोसी परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक आस्था का प्रतीक है। हर वर्ष इस परिक्रमा के माध्यम से समाज में आपसी भाईचारा, सहयोग और धार्मिक चेतना का संदेश मिलता है। इस वर्ष भी परिक्रमा ने यह सिद्ध कर दिया कि आस्था के आगे मौसम और परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकतीं।



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