मां का साया बचपन में उठा, लेकिन हौसले नहीं टूटे
महज दो वर्ष की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। परिवार की आय का सहारा सिलाई मशीन और दादा के ठेले की कमाई तक सीमित रहा। पिता पारस जैन पेशे से टेलर हैं, जबकि दादा ठेला चलाकर परिवार का सहयोग करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने तनिष्क की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।तनिष्क ने अपनी स्कूली शिक्षा राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। साधारण स्कूल से पढ़ाई कर उसने असाधारण उपलब्धि हासिल की है।
पहली असफलता बनी प्रेरणा
12वीं के बाद तनिष्क ने बिना किसी कोचिंग के आईआईटी की तैयारी शुरू की। पिछले वर्ष पहली बार जेईई परीक्षा में 96.23 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। उसे सिविल शाखा और जम्मू का कॉलेज मिला, लेकिन मनपसंद ब्रांच और संस्थान न मिलने के कारण उसने प्रवेश नहीं लिया। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उसने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया। पूरे एक वर्ष तक अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ तैयारी की। नतीजन इस बार 99.30 पर्सेंटाइल के साथ सफलता ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी। परिणाम घोषित होते ही घर में उत्साह का माहौल बन गया। पिता और दादा की आंखों में गर्व के आंसू थे। पड़ोसियों और परिचितों ने मिठाई खिलाकर बधाई दी। नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधि भी घर पहुंचे और तनिष्क का हौसला बढ़ाया। तनिष्क की अगली मंजिल JEE Advanced है। उसका सपना आईआईटी में कंप्यूटर साइंस शाखा में प्रवेश लेकर तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना है। संघर्ष की इस कहानी ने भैसोदामंडी ही नहीं, पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
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