सरकनिया गांव में अनोखी श्रद्धांजलि: अन्नदाता बैलों के स्वर्गवास पर शोक पत्रिका छपवाई, कथा-भंडारे का आयोजन

भवानीमंडी
जहां पशुओं को आज भी केवल संसाधन समझा जाता है, वहीं पचपहाड़ तहसील के सरकनिया गांव में किसान परिवार ने इंसानियत और भारतीय संस्कारों की मिसाल पेश की। हिन्दू धर्म में नंदी के रूप में पूजित दो बैलों सागु और रूपालिया की मौत के बाद राठौड़ व सिसोदिया परिवार ने उनका विधिविधान से स्वर्गवास कार्यक्रम आयोजित किया। परिवार ने अपने अन्नदाता बैलों के निधन पर बाकायदा शोक पत्रिका छपवाई और शोकाकुल परिवार की तरह ग्रामीणों व परिचितों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया। एक फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में सत्यनारायण भगवान की कथा हुई, गंगा माता का गंगोज किया गया और पूर्णिमा रविवार को भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर बैलों को श्रद्धांजलि अर्पित की।


किसान बोले– ये सिर्फ पशु नहीं, परिवार के सदस्य थे
ग्रामीणों के अनुसार सागु और रूपालिया वर्षों तक खेती में किसान परिवार के सच्चे साथी रहे। परिवार का कहना था कि जिस तरह मनुष्य के जाने पर संस्कार किए जाते हैं, उसी तरह हमारे अन्नदाता को भी सम्मान का हक हैं।

गांव में चर्चा का विषय बना आयोजन
सरकनिया में यह आयोजन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। लोग इसे पशु-प्रेम, कृतज्ञता और भारतीय संस्कृति से जुड़ा दुर्लभ उदाहरण बता रहे हैं। वही वाट्सअप पर यह अनोखी शोक पत्रिका अभी कई ग्रुपो में वायरल हो रही है। यह जानकारी किसान परिवार के कुंवर अंतर सिंह ने दी।

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