वहीं कई लोग साइकिल से लंबी दूरी तय कर राशन लाने को मजबूर हैं। मजदूर वर्ग के लोगों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें राशन लेने के लिए अपनी रोज की मजदूरी छोड़नी पड़ती है। कई बार सर्वर या तकनीकी समस्या आने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है, जिससे मजदूरी भी चली जाती है और राशन भी समय पर नहीं मिल पाता।
2800 आबादी, फिर भी दुकान नहीं
मालीपुरा क्षेत्र में वार्ड क्रमांक 8 और 9 आते हैं। यहां करीब 2800 की आबादी और लगभग 1400 मतदाता हैं। करीब 200 राशन कार्डधारी परिवारों को हर माह राशन लेने के लिए दूसरे क्षेत्रों की दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। नगर परिषद क्षेत्र में वर्तमान में केवल दो ही राशन दुकानें संचालित हो रही हैं।
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| चित्र- राशन लेने जाते समय रेलवे फाटक पर भी करना पड़ता इंतजार |
रेलवे की दीवार से बढ़ी दूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले लोग रेलवे पटरी पार कर सीधे राशन लेने चले जाते थे, जिससे दूरी कम पड़ती थी। लेकिन रेलवे द्वारा बाउंड्री बना देने से रास्ता बंद हो गया। अब लोगों को 4 से 5 किमी का चक्कर लगाकर भैसोदा या भैसोदामंडी जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
मालीपुरा में वर्षों से राशन की दुकान नहीं है। रेलवे द्वारा दीवार बनाए जाने के बाद गरीब लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में यहां राशन की दुकान खोली जाना बेहद जरूरी है।
-मनोहर सैनी, पार्षद
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मालीपुरा में राशन की दुकान की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन पर्याप्त कमीशन नहीं मिलने के कारण कोई भी व्यक्ति दुकान संचालित करने को तैयार नहीं हो रहा है। ऐसे में अब रसद विभाग को ही कोई समाधान निकालना चाहिए।
-पप्पू मीणा, पार्षद प्रतिनिधि
जल्द खुलेगी मालीपुरा में राशन की दुकान : रसद अधिकारी
नई दुकान के संबंध में विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया था। भैसोदामंडी व भैसोदा की वर्तमान राशन दुकान से जुड़े हितग्राहियों की संख्या अधिक है। ऐसे में उनमें से मालीपुरा क्षेत्र के पात्र हितग्राहियों को अलग कर नई दुकान से जोड़ा जाएगा, ताकि दोनों क्षेत्रों में राशन वितरण सुविधाजनक तरीके से हो सके।
-रघुराज, रसद अधिकारी अनुविभाग गरोठ

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