भैसोदा की प्राचीन बावड़ियां बदहाल, सफाई व जीर्णोद्धार का इंतजार

जल गंगा संवर्धन अभियान के बावजूद ऐतिहासिक जल स्रोतों की अनदेखी; गंदगी और झाड़ियों से घिरी बावड़ियां

भैसोदामंडी। मध्यप्रदेश में 19 मार्च से शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चल रहा है। अभियान में प्राचीन जल स्रोतों और संरचनाओं के संरक्षण व जीर्णोद्धार पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन भैसोदा नगर परिषद क्षेत्र की ऐतिहासिक बावड़ियां अब भी उपेक्षा की शिकार बनी हुई हैं नगर में भैसोदा सहकारी समिति के सामने सड़क पार, प्राचीन गणेश मंदिर से लगी बावड़ी बदहाली की स्थिति में है। वर्षों से देखरेख नहीं होने के कारण यह बावड़ी झाड़ियों, घास-फूस और गंदगी से घिर चुकी है। पानी भी कचरे से दूषित हो गया है, जिससे इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बावड़ी ग्वालियर रियासतकाल की महत्वपूर्ण जल संरचना है, जो कभी क्षेत्र का प्रमुख जल स्रोत हुआ करती थी। नगर में ऐसी कई बावड़ियां और कुएं मौजूद हैं, जो आज उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। नगर परिषद सीएमओ गिरीश शर्मा ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत क्षेत्र की पुरानी बावड़ियों और कुओं का सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही इनके जीर्णोद्धार और साफ-सफाई की योजना पर काम शुरू किया जाएगा। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाता है, तो इससे जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर भी सुरक्षित रह सकेगी।

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