राहुल गांधी पहुंचे कोटा, बोले- यहां से शुरू करेंगे लड़ाई

कोटा | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी छात्रों से संवाद कार्यक्रम के लिए बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे चार्टर प्लेन से कोटा पहुंचे। एयरपोर्ट पर प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, सचिन पायलट समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया।

इससे पहले एयरपोर्ट लाउंज में पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक साथ नजर आए। पिछले दिनों पायलट पर तल्ख बयानबाजी के बाद पहली बार गहलोत उनसे मिले। दोनों नेताओं ने खूब गर्मजोशी दिखाई, बॉडी लैंग्वेज से दोनों ने ही यह एहसास नहीं होने दिया कि दोनों के बीच सियासी तल्खी है।

राहुल के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे

राहुल गांधी के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी एयरपोर्ट पहुंचे थे। राहुल जैसे ही एयरपोर्ट लाउंज से बाहर निकले और गाड़ी में बैठने लगे, तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें हटाया। राहुल के काफिले को एयरपोर्ट से बाहर निकालने में मशक्कत करनी पड़ी।

राहुल एयरपोर्ट से स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में पहुंचे हैं। यहां भी वे कुछ देर सिलेक्टेड स्टूडेंट्स से चर्चा करेंगे। इसके बाद शाम 5:30 बजे उनका दशहरा मैदान में छात्र संवाद कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ है। इसमें कार्यकर्ताओं को एंट्री नहीं दी जाएगी, सिर्फ स्टूडेंट्स ही मौजूद रहेंगे।

राहुल ने लिखा- किसी बच्चे के सपने ऐसे न टूटने पाएं

कोटा पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा- कोटा के लिए निकल चुका हूं पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं- उमेश और रिया। कल सीकर में उमेश और देहरादून में रिया, दोनों ने Re-NEET के दबाव में अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

22 और 23 साल के बच्चे- जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था, वे इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए। ये मौतें एक टूटी, भ्रष्ट व्यवस्था की देन हैं। और इसके जिम्मेदार हैं मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्होंने छात्रों की रक्षा करने के बजाय बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन और भविष्य के सौदागरों को संरक्षण दिया।

आज कोटा से हम वो लड़ाई शुरू करेंगे, जिसका एक ही मकसद है- किसी बच्चे के सपने ऐसे टूटने न पाएं। किसी मां-बाप को फिर कभी अपने बच्चे को इस तरह खोना न पड़े। हर परिवार की यह पीड़ा अब ‘छात्रों की गूंज’ बनकर पूरे देश में गूंजेगी।

0 Comments

Post a Comment

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post