भवानीमंडी राजस्व कोर्ट ने एक साल में निपटाए 1892 मामले, 10 साल पुराने सभी केस खत्म

भवानीमंडी | एसडीएम श्रद्धा गोमे के राजस्व कोर्ट ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व मामलों को निपटाने में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कोर्ट ने वर्ष के दौरान कुल 1,618 राजस्व मामलों का निपटारा किया, जबकि चालू माह तक यह संख्या बढ़कर 1,892 तक पहुंच गई है। कोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पूर्व में औसतन 112 मामले प्रतिवर्ष निपटाए जाते थे। वर्तमान में मामलों के निस्तारण में 1,344.64 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। निपटारे की दर 18.5 प्रतिशत से बढ़कर 94.54 प्रतिशत हो गई है।

इसके अलावा, एक वर्ष में निपटाए गए मामलों की संख्या पिछले तीन वर्षों में निपटाए गए कुल मामलों से लगभग पांच गुना अधिक रही है।

10 पुराने सभी मामले हुए समाप्त

राजस्व कोर्ट ने दस वर्ष से अधिक पुराने सभी लंबित मामलों का 100 प्रतिशत निस्तारण कर दिया है। वहीं, पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों की संख्या 112 से घटकर केवल 19 रह गई है। यह उपलब्धि लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण भूमि विवादों का भी निपटारा किया। इनमें 60 वर्ष पुराना मेला मैदान विवाद प्रमुख रहा। विवाद सुलझने के बाद संबंधित भूमि नगर पालिका को हस्तांतरित कर दी गई है, जहां अब खेल स्टेडियम के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

अतिक्रमण मुक्त कराई 1068 बीघा सरकारी भूमि

सेवा शिविरों के माध्यम से कुछ ही दिनों में 1,068 बीघा से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। प्रशासन ने इस अभियान को राजस्व सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

सर्वोच्च कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए शिवालय मंदिर, राम मंदिर मांडवी, दुर्गा मंदिर तथा ठाकुरजी मंदिर पिपलिया की भूमि को भी विवादों से मुक्त कराया गया। इससे धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका।

‘जीरो-कॉस्ट मॉडल’ से बढ़ी कार्यक्षमता

राजस्व कोर्ट ने बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के मामलों के निस्तारण के लिए "जीरो-कॉस्ट मॉडल" अपनाया। इसके तहत सोमवार से बुधवार तक सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय विशेष रूप से राजस्व न्यायालय की सुनवाई के लिए आरक्षित किया गया, जिसे "Sacrosanct Judicial Window" नाम दिया गया।

इस व्यवस्था से मामलों की नियमित सुनवाई और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हुआ।

मौके पर ही निपटाए गए हजारों आवेदन

राजस्थान भूराजस्व अधिनियम की धारा 136 के तहत कुल 5,132 आवेदनों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शहरी एवं ग्रामीण सेवा शिविरों में विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे लोगों को न्यायालयी प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत हुई।

टीमवर्क और जनविश्वास को बताया सफलता का आधार

पीठासीन अधिकारी श्रद्धा गोमे ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार की प्रतिबद्धता, जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन, कोर्ट कर्मियों की मेहनत तथा आमजन के विश्वास को दिया। उन्होंने लोगों से सेवा शिविरों में अधिकाधिक भागीदारी कर अपनी समस्याओं का समयबद्ध समाधान कराने की अपील की।

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