फोटो खिंचवाए, शील्ड दी... लेकिन प्रशस्ति पत्र नहीं: दो साल से भटक रहा मेधावी छात्र का पिता, प्रतियोगिताओं से ही बना ली दूरी

जिला विज्ञान मेला, ब्लॉक युवा महोत्सव और संभागीय युवा महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद नहीं मिले प्रशस्ति पत्र; पिता ने कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से लगाई न्याय की गुहार, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग।

कपिल चौहान । भवानीमंडी | एक ओर सरकार विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और प्रतिभा आधारित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की लापरवाही एक होनहार छात्र का मनोबल तोड़ने का कारण बन गई। करावन (भवानीमंडी) निवासी एक पिता ने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के नाम ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विस्तृत परिवाद देकर आरोप लगाया है कि उनके मेधावी पुत्र शुभ जैन को विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार मंच पर सम्मानित तो किया गया, फोटो भी खिंचवाए गए, लेकिन आज तक प्रशस्ति पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। इसका इतना गहरा मानसिक प्रभाव पड़ा कि छात्र ने अब ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेना ही लगभग बंद कर दिया।

परिवाद के अनुसार शुभ जैन वर्तमान में भवानीमंडी के सेठ आनंदीलाल पोद्दार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 11 विज्ञान (गणित) का छात्र है। उसने कक्षा 10 में अध्ययन के दौरान विज्ञान मेला और युवा महोत्सव जैसी कई प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

पिता ने बताया कि 7 से 9 अक्टूबर 2024 तक भवानीमंडी में आयोजित जिला स्तरीय विज्ञान मेले में शुभ जैन ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। मंच पर अतिथियों ने शील्ड और प्रशस्ति पत्र हाथ में देकर फोटो खिंचवाए, लेकिन बाद में यह कहकर प्रशस्ति पत्र वापस ले लिया गया कि अधिकारियों के हस्ताक्षर होने के बाद दिया जाएगा। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद कई बार विद्यालय के चक्कर लगाने पर भी प्रशस्ति पत्र नहीं मिला। अंततः जवाब मिला कि "ऊपर से आया ही नहीं, तो हम कहां से दें।"

इसी तरह 7 दिसंबर 2024 को आयोजित ब्लॉक स्तरीय युवा महोत्सव में विज्ञान प्रोजेक्ट पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद भी शील्ड तो मिली, लेकिन प्रशस्ति पत्र आज तक नहीं दिया गया। जिला स्तरीय युवा महोत्सव में सम्मान मिला, जबकि 25 दिसंबर 2024 को कोटा में आयोजित संभागीय युवा महोत्सव में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर भी केवल शील्ड देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई।

प्रशस्ति पत्र केवल कागज नहीं, प्रतिभा की पहचान है

परिवाद में पिता ने कहा है कि प्रशस्ति पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह छात्र की मेहनत, उपलब्धि और भविष्य का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जब मंच पर फोटो खिंचवाने के लिए बच्चों के हाथ में प्रशस्ति पत्र थमा दिए जाएं और बाद में वापस लेकर कभी दिए ही न जाएं, तो यह उनके आत्मसम्मान और मनोबल पर गंभीर चोट है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद उनके पुत्र ने विज्ञान मेलों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का उत्साह ही खो दिया, जो किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के साथ अन्याय है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधारने की मांग

परिवाद में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच कर यह तय किया जाए कि किस स्तर पर लापरवाही हुई। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए तथा जिन-जिन प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र नहीं मिले, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से विद्यार्थियों के प्रति क्षमायाचना भी करवाई जाए।

पिता ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगिता के समापन पर डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रशस्ति पत्र भी मौके पर ही वितरित किए जाएं, ताकि किसी भी विद्यार्थी का उत्साह प्रभावित न हो।

बड़ा सवाल

प्रतियोगिताओं के आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। मंच सजते हैं, अतिथियों का सम्मान होता है, समाचार प्रकाशित होते हैं, लेकिन यदि विजेता विद्यार्थियों को उनका प्रशस्ति पत्र तक समय पर नहीं मिले, तो क्या यह केवल औपचारिक सम्मान बनकर रह गया है? यह मामला शिक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि कहीं प्रशासनिक लापरवाही भविष्य की प्रतिभाओं का उत्साह तो नहीं छीन रही।

         हमारे पास शिकायत आई है। मामले की जांच करवाएंगे और इसमे जिसने भी शिथिलता बरती है उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

कल्याणमल मेघवाल, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भवानीमंडी

0 Comments

Post a Comment

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post