दशा माता पर्व जो सारे क्षेत्र में होलिका दहन के दस दिन बाद मनाया जाता है। महिलाये दशा माता के निमित्त व्रत रखकर कच्चे सूत का दस तार वाला धागा, 10 बार पीपल के पेड़ पर लपेटती है और उस धागे में 10 गांठ लगाकर अपने गले में एक साल तक धारण करती है। ऐसा करने से जीवन में आ रहे रोग व कष्ट दूर हो जाते है। परिवार के सभी लोगो की हर तरह की समस्या दूर हो जाती है और परिवार में सुख, समृद्धि आती है। हर प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। दशा माता के व्रत, पूजन में घर की साफ- सफाई पर विशेष जोर दिया है। घरेलू सामान व झाड़ू खरीदना शुभ माना गया हैइस व्रत में महिलाएं सर्वप्रथम भगवान विष्णु स्वरूप पीपल के पेड़ की विधि विधान व श्रद्धा से पूजन करती है।
जिसके बाद परिवार की सुख, समृद्धि के लिए भगवान विष्णु व माता पार्वती से कामना करते हुवे गले में पूजा का दस गांठ वाला डोरा धारण करती है। फिर पीपल के पेड़ के नीचे ब्राह्मण देवता से नलज़ दमयंती की कथा श्रवण करती है और यथा योग्य दक्षिणा देकर आती है। फिर घर आकर मुख्य दरवाजे के दोनों और हल्दी, कुमकुम के छापे लगाती है। ऐसा करने से घर में बरकत आती है और धीरे- धीरे घर परिवार की दशा सुधरने लगती है।
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