इस घटना को 2 घंटे हो गए, लेकिन सुबह 10 बजे तक भी हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. कैलाश मीणा मौके पर नहीं पहुंचे। वहीं, काम बंद होने से आज जेके लोन में जांचे और अन्य काम बंद रहे। इससे मरीजों के परिजन सबसे ज्यादा परेशान हुए।
दरअसल, ये पूरा विवाद पार्किंग को लेकर हुआ। प्रदर्शन में लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर, नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य स्टाफ शामिल रहा। लैब टेक्नीशियन संघ के प्रदेशाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया- हॉस्पिटल परिसर में जितनी भी कवर्ड पार्किंग है, उसे डॉक्टर्स के लिए आरक्षित कर रखा है। दूसरे स्टाफ के लिए कोई भी जगह कवर्ड पार्किंग नहीं है। गर्मी में भरी धूप में कई गाड़ियां (दुपहिया वाहन) पार्क करने पड़ते है।
एक कवर्ड जगह को दुपहिया वाहनों (स्टाफ के लिए) छोड़ रखा था, लेकिन कल उस जगह को भी एक अन्य डॉक्टर की गाड़ी के लिए आरक्षित कर दिया। इससे नाराज होकर आज सभी कर्मचारी विरोध पर उतर आए और काम बंद करके प्रदर्शन करने लगे।
ब्लड सैंपल समेत दूसरी जांचे बंद
कार्य बहिष्कार के कारण आज खून की जांचे समेत अन्य जांचे सुबह 10 बजे तक बंद रही। वहीं, अन्य कार्य जिनमें पैरामेडिकल स्टाफ लगा था वह भी नहीं हुआ। वार्डों में भी मरीजों को परेशानी हुई, जहां कुछ जगह नर्सिंग कर्मचारियों ने काम बंद रखा।
डॉक्टरों ने संभाला काम
पैरामेडिकल स्टाफ के काम बंद करने के बाद हॉस्पिटल की व्यवस्था रेजीडेंट्स डॉक्टर्स और सीनियर डॉक्टर्स ने संभाली। ओपीडी, आईपीडी में मरीजों को देखने, दवाईयां देने से लेकर तमाम कार्य रेजीडेंट्स ने किया। वार्डो में ब्लड सैंपल का काम भी रेजीडेंट्स ने किया।
ठेकेदार भी कर रहा है मनमानी
इधर पार्किंग ठेकेदार भी स्टाफ को कई जगह पार्किंग नहीं लगाने देता। कोई महिला स्टाफ अगर किसी सुरक्षित जगह अपने गाड़ी (दुपहिया या चौपहिया) पार्क करती है तो उसे गार्ड के जरिए हटवा देता है।
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