डीडीसी काउंटर पर दवाइयां नहीं मिलने से लोग वापस लौट रहे हैं या अन्य डीडीसी काउंटर नंबर 10, 11 पर भेजा जा रहा है। ये काउंटर वो है, जहां मरीज डॉक्टर की लिखी पर्ची और उसके साथ अपने पहचान पत्र की फोटो कॉपी (आधार और जनआधार) जमा करवाता है। उसके बाद उसे उसी दिन (2 से 3 घंटे बाद) या अगले दिन दवाई उपलब्ध करवाई जाती है। इन दिनों इन काउंटरों पर लंबी लाइनें लग रही हैं। मरीज को पर्ची जमा करवाने में ही एक से दो घंटे या उससे भी ज्यादा वक्त का इंतजार करना पड़ता है।
हमारे यहां एमसीडीडब्ल्यू में जो दवाइयां उपलब्ध वो दे रहे
मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज (MOIC) डॉ. जगदीश मोदी का कहना है कि हमारे यहां दवाइयां मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयरआउस (MCDW) से आती हैं। जो दवाइयां MCDW में नहीं होती उनकी NAC हमें मिलती है। इसे हम हॉस्पिटल के सेंट्रल ड्रग स्टोर के MOIC को देते हैं। ताकि वे हॉस्पिटल स्तर पर उन दवाइयों की खरीद करके दे सके। अभी हमारे पास जितनी दवाइयां ड्रग वेयरआउस में उपलब्ध हैं, वो डीडीसी, आईसीयू वार्ड, जनरल वार्ड, ओटी में दे रहे हैं।
बल्क खरीद के टेंडर कर दिए है, जल्द रेट कॉन्ट्रेक्ट होगा
इधर एसएमएस हॉस्पिटल के सेंट्रल ड्रग स्टोर के MOIC डॉ. संजय शेखावत का कहना है कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में जो दवाइयां लिस्टेट हैं। उनमें से करीब 500 से ज्यादा दवाइयों का रेट कॉन्ट्रेक्ट हम कर चुके हैं। कुछ दवाइयां ऐसी हैं, जिनकी बल्क खरीद के लिए टेंडर कर दिए हैं। उनके जल्द रेट कॉन्ट्रेक्ट करके खरीद शुरू करेंगे। जिन मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रही, उनको लोकल स्तर पर डिस्काउंट में खरीद करके डीडीसी 10 और 11 नंबर से उपलब्ध करवा रहे हैं।
जल्द ही हम दवाईयों की शॉर्टेज पूरी करेंगे
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी का कहना है कि हम ज्यादा से ज्यादा दवाइयां RMRS फंड से खरीद कर मरीजों काे दे रहे हैं। जो रुटिन की दवाइयां नहीं आ रहीं।
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