फादर्स-डे: पिता के नाम एनजीओ तो चल रहे चैरिटेबल हॉस्पिटल, बेटे की याद में एक पिता चला रहा कैंसर जागरूकता फाउंडेशन

कपिल चौहान | भवानीमंडी: आज पूरा ही विश्व फादर्स डे मना रहा है। आज के दिन लोग आमतौर पर पिता का आशीर्वाद लेते है, केक काटकर सेलिब्रेट करते है। वर्तमान परिवेश में पिता की याद व सम्मान में अपने दिल की बात सोशल मिडिया पर साझा करने व रील बनाने का भी चलन है। इन्ही सब के कुछ खास लोग ऐसे भी है जो अपने पिता के नाम को मरणोपरांत भी जीवित रखें हुवे है। कईयों ने तो जो सपना उनके पिता ने देखा, उसको पूरा करने के लिए जी जान लगा दी। 

भवानीमंडी शहर की बात की जाए तो ऐसे नामों में एक नाम है जीनत हरनाल नून, जो स्व जेके नून लार्ड नून की सुपुत्री है। जो सपना उनके पिता लॉर्ड नून ने देखा था कि भवानीमंडी में एक चैरिटेबल हॉस्पिटल हो ताकि क्षेत्रीय लोगो की मानव सेवा की जा सकें। जीनत नून ने पिता को दुनिया छोड़कर जाने के बाद भी बदस्तूर निभाया और वर्तमान में इस हॉस्पिटल को शहर के भामाशाह डॉ जेके अरोड़ा के रजत ग्रुप के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है।

समीपवर्तीय सुनेल कस्बा लार्ड नून का पैतृक गांव बताया जाता है। इस हॉस्पिटल की स्थापना लार्ड नून ने अपनी मां की याद में कई थी और बेटी जीनत इसको अग्रसर करते हुवे अपने पिता व दादी के नाम को चार चांद लगाए हुवे है। इसकी स्थापना भी 3 मई यानी भवानीमंडी शहर के स्थापना दिवस के दिन 2008 में हुई थी। आज इसको पूरे 17 साल होने को आये है। बस इस बात का खास ध्यान रखने की जरूरत है कि इस चैरिटेबल अस्पताल का उधेश्य समय के साथ निरतंर जीवंत रहे। इस तरह पिता के एक सुनहरे सपने को पंख लगने के साथ ही मानवता का भला होता रहेगा और जीनत नून के पिता स्व लार्ड जेके नून एक फरिश्ते के रूप में इस क्षेत्र की जनता के हृदय में हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे। आज के युग में एक बेटी के लिए ऐसा पिता होना और पिता के सपने को साकार करने वाली बेटी होना बहुत ही खास बात है।

पिता के नाम से चला रहे एनजीओ 

अब बात करते है शहर के एक युवा समाजसेवी के रूप में दिनोदिन उभर रहे समाजसेवक गणेश सालेचा की। यह अपने स्व पिता की स्मृति में एक एनजीओ चलाते है। जिसका नाम इन्होंने अपने पिता के नाम पर रखा है। उनके पिता मानमल सालेचा का निधन 21 मार्च 2022 को कोरोना महामारी से हुआ। पिता की स्मृति को हमेशा लोगों मे जीवंत बनायें रखने के लिए पुत्र गणेश ने उनके नाम से 2023 में एक संस्थान बसंतीलाल मानमल सालेचा सेवा संस्थान भवानीमंडी के नाम से गठित किया।इस संस्थान के द्वारा नेत्र चिकित्सा शिविर, गरीब छात्रों को शिक्षा से जोड़ना, प्रतिभावान का सम्मान, देव दर्शनार्थ यात्रा, विकलांग महिला पुरुष सभी को वृद्ध ज़न यात्रा, स्वास्थ्य शिविर और अनेकों जनहित के कार्य प्राथमिकता से किए। संस्थान के एक ओर भाग घुमन्तू गो माता सेवा समिति के द्वारा प्रतिदिन रात्री में गौमाताओ को चारा डालने का काम निरंतर चल रहा है।


कुत्तों को रेबीज बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान, पशु पक्षियों के लिए पानी की टंकियां रखना, परिंदे पेड़ों पर बांधे गए। रक्तदान महादानव सेवा समिति के द्वारा जरुरतमंद के लिए रक्त की व्यवस्था का भी कार्य इसी संस्थान के नेतृत्व में किया जा रहा है। गणेश सालेचा बताते है कि अपने माता पिता को उनके मरणोपरांत भी लोग उनको जाने। उनके नाम से सामाजिक- धार्मिक कार्य हो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

बेटे की याद में पिता ने बनाया कैंसर जागरूकता फाउंडेशन 

अभी तक तो हमने ऐसे बेटा- बेटियों की बात करी जिन्होंने अपने पिता की याद में उनके आदर्शों व सम्मान के लिए बहुत कुछ किया। अब हम बताते है एक ऐसे पिता के बारे में जिसने अपने 14 वर्षीय बेटे की मृत्यु के बाद एक ऐसे फाउंडेशन की स्थापना की जो कैंसर जागरूकता के लिए कार्यरत है। भवानीमंडी के छोटे से गांव सुलिया में जन्मे पिता फूलचंद वर्मा के बेटे अंकित वर्मा की पैर में कैंसर हो जाने की वजह से सन 2018 में मृत्यु हो गई। एक पिता होने के नाते अपने बेटे को खोने से ज्यादा दुख कुछ हो ही नही सकता। पर इस दुख दर्द के बीच हिम्मत कर लोगो की जागरूकता हेतु एक केंसर जागरूकता फाउंडेशन की स्थापना की गई, जो गांव-गांव में जाकर केंसर जागरूकता के बारे में कार्यरत है। इसके साथ ही फूलचंद वर्मा एक पर्यावरण प्रेमी भी है, जो पृथ्वी बचाव चैरिटेबल ट्रस्ट नामक एनजीओ भी चलाते है। बेटे की याद में एक पिता एक एनजीओ के जरिये लोगो को कैंसर के प्रति जागरूक कर रहा है। ऐसा पिता होना भी ख़ास है।

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