स्थानीय निवासी जितेंद ने बताया- गांव में हर दिन बकरियां दम तोड़ रही है। रविवार के दिन 30 से 40 बकरियों की मौत हुई, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई।
वेटनरी डॉ. सुभाष भटनागर ने बताया- बकरियों की मौत की सूचना पर टीम मौके पर गई। जंगल के इलाके में सर्च किया। आज भी तीन डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची हैं। करीब 20 लोगों ने एक सप्ताह में 80 से 100 बकरियों मरने की बात बताई है।
डॉ. सुभाष भटनागर ने बताया- शुरुआती बारिश के बाद धोकडे (जंगल में उगने वाले पेड़) में साइनाइड आता है। जानवर उसकी टहनियां,पत्तियां खा लेते है तो उनके लीवर सेल डेड होने लगी है। लंग्स पर भी असर पड़ने लगता है। इसका असर 20 दिन बाद दिखाई देने लगता है।
संभवतया बारिश के बाद धोकडे का चारा खाने से बकरियों के लीवर और लंग्स में खराबी हुई और उनकी मौत हो गई। मौत के कारणों की जांच के लिए बकरियों के शवों का पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा। अभी टीम जंगल में सर्च अभियान चला रही है।
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