इसके बाद आरती में शामिल होकर माता सरस्वती की विशेष पूजा की और मंच पर उपस्थित सभी विधायकों के साथ मिलकर दीप प्रज्वलन किया। मुख्यमंत्री का सभागार में पहुंचने पर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ और माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन सभी बाद मुख्यमंत्री द्वारा रिमोट का बटन दबाकर चौथे संस्करण फॉरेस्ट रिट्रीट गांधी सागर का उद्घाटन किया। वही 2 घंटे देरी से पंहुचे CM का हेलीकॉप्टर शाम 5:55 बजे हेलीपैड पर उतरा। 6:15 बजे आरती हुई, 6:21 बजे समाप्त हुई और 6:30 बजे वे सभागार पहुंचे। लगभग दो घंटे की देरी के बावजूद सभागार में मौजूद 5000 से अधिक लोगों का उत्साह चरम पर रहा। वही
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के देर से आने के कारण कई महिला-पुरुषों को बसें समय पर न मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ लोग अपने खर्चे पर बसेरा कर गांधीसागर पहुंचे थे। चारों ओर जंगल से घिरे क्षेत्र में इंतजार करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।
इस दौरान नीमच जिले के तीनों विधायक जावद, मनासा और नीमच के साथ राजस्थान से भी एक विधायक शामिल हुए। मंच पर सांसद सुधीर गुप्ता, बंशीलाल गुर्जर, विधायक चन्दर सिंह सिसोदिया,दिलीप सिंह परिहार, माधव मारु, ओमप्रकाश सकलेचा, राजस्थान से रावतभाटा विधायक सुरेश धाकड़, जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित कई दिग्गज मौजूद रहे। चंदर सिंह ने अपने भाषण मे काम के मामले में भाजपा युक्त और कांग्रेस मुक्त” बताया। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में गांधीसागर फॉरेस्ट रीट्रीट को प्रदेश की पर्यटन पहचान बताते हुए कहा कि यह आयोजन स्थानीय स्तर पर विकास और रोजगार के नए अवसर खोलेगा। मुख्यमंत्री के आने से पहले सभागार में प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया।
वही मीडिया के लिए बैठने की व्यवस्था बेहतरीन रही। मुख्यमंत्री के आगमन से आसपास के जिलों से बसों, चारपहिया वाहनों और मोटरसाइकिलों का सेलाब गांधीसागर पहुंचा।
इसी बीच हाल ही में उज्जैन संभाग पर्यावरण परिषद प्रभारी बने कमल हटवाल भी गरोठ-भानपुरा विधानसभा क्षेत्र के भेसोदामंडी से विशेष रूप से पहुंचे। वे एक बस और तीन कारों के साथ महिलाओं, बच्चों और कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत करने आए।
लेकिन इस बिच मिडिया से बचते हुए मुख्यमंत्री बिना बाइट दिए ही रवाना हो गए। मुख्यमंत्री के देर से पहुंचने के कारण सभागार को सीमित समय ही दिया और अंधेरा होने से हेलीकॉप्टर नही उड़ने से रात्रि विश्राम गांधीसागर में ही करना पड़ा।







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