ग्रामीणों के अनुसार, अम्बा माता की प्रतिमा चमत्कारी मानी जाती है और यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। नवरात्रि के दिनों में मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहता है। श्रद्धालु त्रिशूल पर डोरा बांधकर अपनी मनोकामनाएं मां अम्बे से मांगते नजर आए। शाम ढलते ही देवनारायण नवदुर्गा गरबा मंडल द्वारा आयोजित गरबा महोत्सव में रंग-बिरंगे परिधानों में सजे युवक-युवतियां गरबे की थाप पर झूमते रहे। मां अम्बे की आरती के बाद गरबे की धूम से वातावरण भक्तिमय हो उठा। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
गांव में पहली बार ‘छावा’ फिल्म का प्रदर्शन
नवरात्रि के छठे दिन गरबा समिति ने ऐतिहासिक मराठी फिल्म ‘छावा’ का विशेष प्रदर्शन किया। बड़ी स्क्रीन पर दिखाई गई फिल्म देखने के लिए ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। समिति के अनुसार, गांव की कई महिलाएं ऐसी थीं, जिन्होंने पहली बार सिनेमा देखा। फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र शंभाजी महाराज (छावा) के संघर्ष और औरंगजेब की क्रूरता का चित्रण किया गया, जिसने दर्शकों में देशभक्ति और स्वराज की भावना को प्रज्वलित कर दिया। इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने सरपंच प्रतिनिधि बापुलाल डांगी, उपसरपंच राजेंद्र सिंह पंवार, भाजपा धुंधड़का मंडल अध्यक्ष राजेश धाकड़, महामंत्री पुष्कर बैरागी, परशुराम परिहार, शिवनारायण वृतिया सहित सैकड़ों ग्रामीण।
ग्रामवासियों का सामूहिक सहयोग बनी मिसाल
यह पूरा आयोजन ग्रामवासियों की सामूहिक आस्था और सहभागिता का प्रतीक बन गया। नवरात्रि ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति एक साथ मिलती हैं, तो गांव उत्सव स्थल में बदल जाता है।


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