पचपहाड़। क्षेत्र के किसानों की बदहाली चरम पर है। पचपहाड़ तहसील के सरोद गांव में एक किसान ने निराश होकर अपनी खड़ी सोयाबीन की फसल को आग के हवाले कर दिया।
किसान गोरधन सिंह पिता नाथू सिंह ने बताया कि खेती पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। कटाई का खर्चा 8000 रुपये और इकट्ठी करने का खर्चा 2000 रुपये आया। जब मशीन चलाई गई तो एक घंटे में मात्र 20 किलो सोयाबीन निकली, जिसका भाव लगभग 600 रुपये बैठा, जबकि मशीन का खर्चा 1200 रुपये प्रति घंटा था। ऐसे हालात में किसान ने मजबूरीवश फसल जला दी ताकि मशीन का अतिरिक्त खर्च बचाया जा सके। भारतीय किसान संघ के पीरू सिंह मोया खेड़ा ने कहा कि एक बीघा खेत में 11 से 12 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन पैदावार मात्र 30 से 40 किलो प्रति बीघा ही हो रही है। उन्होंने बताया कि किसान गंभीर संकट में हैं और शासन-प्रशासन से तत्काल बीमा व मुआवजे की मांग की है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित राहत नहीं दी गई तो क्षेत्र के किसान आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।
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