झालावाड़: सरकारी योजनाओं को ठगने वाले अन्तर्राज्यीय साइबर गिरोह के 30 आरोपियों को शुक्रवार को एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। सुरक्षा के मद्देनज़र कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। अदालत ने सभी आरोपियों को सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने एक दिन पूर्व “ऑपरेशन शटरडाउन” के तहत इस हाई-प्रोफाइल गिरोह का पर्दाफाश किया था। यह नेटवर्क किसानों, पेंशनधारकों और लाभार्थियों के नाम पर सरकारी खज़ाने से करोड़ों की रकम हड़प रहा था। इस ठगी का मास्टरमाइंड रामावतार सैनी बताया जा रहा है। जांच में अब तक ₹52.69 लाख नकद, 14 लग्जरी कारें, 35 लैपटॉप और कंप्यूटर, साथ ही सैकड़ों बैंक खाते व पहचान दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन सभी की गहन पड़ताल कर रही है।
डिप्टी प्रेम कुमार ने बताया कि 7 दिन का रिमांड आगे की जांच और नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने के लिए आवश्यक था। इस दौरान डिप्टी हर्षराज सिंह खरेड़ा, सीआई पवन मीना, कोतवाली सीआई मुकेश मीना, आरआई मोहनलाल पोसवाल सहित पुलिस जाब्ता मौजूद रहा।
11 हजार खातों में हुए ट्रांजेक्शन की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, अब तक करीब 11 हजार बैंक खातों में सरकारी राशि के ट्रांजेक्शन का पता चला है। इन खातों में करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। जांच में बैंक अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों की टीमें भी शामिल की गई हैं।


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