भवानीमंडी: स्थानीय जैन श्वेतांबर पार्श्वनाथ मंदिर में शुक्रवार को ज्ञान पंचमी महापर्व बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।दीपावली के पांचवें दिन मनाई जाने वाली ज्ञान पंचमी को लाभ पंचमी और सौभाग्य पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर प. पू. पंन्यास श्री शीलचन्द्र विजयजी म. सा. की निश्रा में 45 आगमों की सामूहिक स्थापना की गई। तत्पश्चात बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने ज्ञान की वासेक्षेप पूजा संपन्न की।
पूज्य गुरुदेव ने प्रवचन में कहा कि ज्ञान पंचमी जिनवाणी के महत्व को स्मरण करने और ज्ञान की आराधना का पर्व है। जैन धर्म में ज्ञान के पाँच प्रकार मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान, अवधि ज्ञान, मन-पर्याय ज्ञान और केवल ज्ञान बताए गए हैं। इनमें श्रुत ज्ञान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसी के माध्यम से आत्मा सही और गलत का निर्णय कर सकती है। इस दिन देवी सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। आयोजन में नगर के अनेक श्रावक- श्राविकाओं ने उपस्थित होकर लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में संघ अध्यक्ष यशवंत डड्डा, अशोक लोढ़ा, जितेंद्र सुराणा, विवेक लोढ़ा, दिनेश कटारिया, अशोक पिछोलिया, किशोर लोढ़ा, दिलीप गोटावाला, महावीर बापना एवं पीयूष चौधरी सहित बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे।


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