“मरने के बाद भी कोई जी सकता है अगर उसकी आंखें किसी और को रोशनी दे जाएं”, गौतमचंद जैन बने “रोशनी के दूत”


भवानीमंडी
मानवता की मिसाल पेश करते हुए सिंहपुर निवासी गौतमचंद जैन (45) ने मृत्यु के बाद भी दो लोगों को नई रोशनी दे दी। गुरुवार तड़के कोटा के सुधा हॉस्पिटल में उनका आकस्मिक निधन हो गया। दुख की इस घड़ी में भी उनके भाई धर्मचंद जैन ने बड़ा दिल दिखाते हुए नेत्रदान करवाने का निर्णय लिया। शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र एवं जैन सोशल ग्रुप भवानीमंडी के नेत्रदान प्रभारी नरेंद्र जैन ने बताया कि परिजनों ने सुबह ही संपर्क कर जानकारी दी कि क्या कोटा हॉस्पिटल में नेत्रदान संभव है। इस पर उन्होंने तुरंत फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ से संपर्क किया। डॉ. गौड़ ने तत्परता दिखाते हुए जगपुरा स्थित सुधा हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज पहुंचकर नेत्रदान प्रक्रिया पूरी की।

इस पुण्य कार्य में गणेश सालेचा और दिलीप जैन का विशेष सहयोग रहा। उल्लेखनीय है कि मृतक के परिवार में पूर्व में भी नेत्रदान की परंपरा रही है। उनके परिजन पचपहाड़ निवासी बाबूलाल जैन का भी पहले नेत्रदान हुआ था। भवानीमंडी क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में हाड़ौती संभाग में नेत्रदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब यह मुहिम ग्रामीण क्षेत्रों तक भी फैल रही है। मिश्रोली, बनी, करावन, आवर जैसे गांवों में भी कई परिवारों ने नेत्रदान की मिसालें कायम की हैं।

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