दीपावली पर “रोशनी का दान”- हीराबाई जायसवाल ने दी दो नेत्रहीनों को नई दृष्टि भवानीमंडी में बढ़ रहा है नेत्रदान का कारवां, एक ही परिवार से पाँचवाँ नेत्रदा बना प्रेरणास्पद उदाहरण


भवानीमंडी
दीपावली का पर्व जहाँ दीपों की रोशनी से घर जगमगाते हैं, वहीं भवानीमंडी की हीराबाई जायसवाल ने मृत्यु के बाद दो नेत्रहीनों के जीवन में “दृष्टि की दीपावली” जला दी। भारत विकास परिषद और शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता ‘दलाल’ ने बताया कि उषा कॉलोनी निवासी हीराबाई जायसवाल (माताजी — बालचंद, घनश्याम, कमलेश और प्रकाश जायसवाल) के निधन के बाद उनके नाती अविनाश जायसवाल ने तुरंत नेत्रदान का निर्णय लिया।
सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ दीपावली पूजा के बीच से ही रात्रि 2 बजे “ज्योति रथ” से भवानीमंडी पहुंचे और परिवार की उपस्थिति में नेत्रदान प्रक्रिया पूरी की। उसी रात वे पहले रावतभाटा पहुँचे, जहाँ समाजसेवी सत्यनारायण अग्रवाल की पत्नी कौशल्या देवी का भी नेत्रदान संपादित किया गया। इस तरह एक ही रात में दो जोड़ी नेत्र प्राप्त कर चार नेत्रहीनों को नई रोशनी देने की व्यवस्था हो सकी।

नेत्रदान प्रभारी दलाल के अनुसार, यह जायसवाल परिवार से पाँचवाँ नेत्रदान है। इससे पहले हीराबाई के पति हजारीलालजी, देवर देवप्रसादजी, भतीजे सत्यनारायण और रामावतार जायसवाल भी नेत्रदान कर चुके हैं। पूरे संभाग में यह दूसरी बार है जब एक ही परिवार से पाँच जोड़ी नेत्रदान हुए हों।

भवानीमंडी में यह 149वाँ नेत्रदान रहा। नगर पार्षद पिंटू जायसवाल ने कहा — “दीपावली रोशनी का पर्व है, और किसी नेत्रहीन को दृष्टि देना उससे बड़ा कोई परोपकार नहीं। नानीजी की आंखें अब भी दो असहायों की जिंदगी में उजाला फैलाती रहेंगी।”
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ ने भी इस उदाहरण को भावनात्मक शब्दों में कहा — “जब दीपों की आरती की थाल सज रही थी, उसी वक्त कोई परिवार किसी अंधेरे में उजाला बाँटने की तैयारी कर रहा था। यही सच्ची दीपावली है।”

भवानीमंडी से उठी “नेत्र ज्योति” अब ग्रामीण इलाकों में भी पहुँच रही है — मिश्रोली, बनी, करावन और आवर जैसे गांवों में भी कई परिवारों ने नेत्रदान को अपनी परंपरा बना लिया है।

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