इसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए जतिन की मेडिकल जांच और रिपोर्ट तैयार करवाई। पूरी फाइल जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष पुखराज पाराशर को भेजी गई। प्रयासों के बाद ‘बाल स्वास्थ्य मिशन’ के तहत जतिन के इलाज को स्वीकृति मिली और भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल में करीब 8 से 9 लाख रुपए खर्च वाला ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क कराया गया। करीब चार घंटे चले जटिल ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे जतिन की आवाज लौटने लगी। अब वह अपने माता-पिता को पुकारने लगा है। शुक्रवार को राजेश गुप्ता ‘करावन’ खुद बकानी स्थित जतिन के घर पहुंचे। जैसे ही बच्चे ने तोतली आवाज में “अंकल” कहा, वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे। माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने कहा कि उन्होंने बेटे के बोलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन राजेश गुप्ता ने उनका विश्वास लौटाया और परिवार की खुशियां वापस ला दीं। इस दौरान राजेश गुप्ता ‘करावन’ ने कहा कि उन्होंने कोई एहसान नहीं किया, बल्कि यह उनका दायित्व था। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है। जतिन पढ़-लिखकर आगे बढ़े और देश का नाम रोशन करे, यही उनकी कामना है।
जतिन के बोलने की खबर फैलते ही बकानी और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोग इसे संवेदनशील जनसेवा का उदाहरण बताते हुए कह रहे हैं कि वादा निभाने वाले जनप्रतिनिधि समाज में उम्मीद जगाते हैं।


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