प्राचीन राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की सम्पत्ति बेचने के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, एसडीएम को ज्ञापन

सोशल मीडिया पर लगातार विरोध के बाद बनी मंदिर बचाओ संघर्ष समिति, रजिस्ट्री कैंसल करने की मांग 

भवानीमंडी  बुधवार को नगर के 100 साल से भी ज्यादा पुराने राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित एक दुकान को बेच देने के विरोध में बाइक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। हालांकि दुकान बिकते ही सोशल मीडिया पर विरोध गहराया हुवा है। बीते मंगलवार को ही बनी मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ो कार्यकर्ताओ ने सड़को पर उतरकर एसडीएम कार्यालय पहुँचकर उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा गुपचुप तरीके से बेची गयी दुकान की रजिस्ट्री रद्द करवाई जाए और इस अमूल्य धार्मिक धरोहर को पुनः राधेश्याम मन्दिर के नाम की जाए। व्यापार महासंघ के दोनों पूर्व अध्यक्ष राजेश नाहर व प्रितपाल सिंह ने मौके पर एसडीएम को कहा कि इस दुकान को बेचने की प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नही रखी गई। मन्दिर हित व जनभवना के पक्ष में रजिस्ट्री कैंसल की जाए। प्रितपाल सिंह बोले कि नीलामी की सूचना ना किसी प्रमुख समाचार पत्र में सार्वजनिक की गई और ना ही नीलामी को लेकर नगर पालिका के सूचना बोर्ड व मन्दिर के सूचना पट्ट पर लिखा गया। ना कोई मुनादी करवाई। 18 की शाम को नीलामी बताई और 19 मई को सुबह 1 बजे रजिस्ट्री हो गई। इतना फ़ास्ट तो हमारा पर्सनल काम भी हम नही कर सकते है। 14 घण्टे में नीलामी होके रजिस्ट्री बन गई। इसका एक लूज पॉइंट ये है कि जो गलती उनसे हो गई कि वो नक्शा जो रजिस्ट्री में उन्होंने लगा रखा है वो 10 मई को बना हुवा है। जिस पर क्रेता मुकेश शर्मा व ट्रस्ट अध्यक्ष केके राठी के हस्ताक्षर है। तो 10 मई को कैसे पता था कि कौन खरीदेगा। इसका मतलब क्लियर है कि सुनियोजित प्रोग्राम था। देवस्थान विभाग की भूमिका भी इसमे संदिग्ध है। इसको लेकर एसडीएम गोमे ने विरोधकर्ताओ से कहा कि मैं इस मामले से संबंधित समस्त दस्तावेज मंगवा लेती हूं। 

इन्होंने जताई विरोध को सहमति, हिन्दू संघटनो से नही दिखा कोई
इस पूरे मामले को लेकर मंगलवार की शाम को एक विशेष मीटिंग रखी गई थी औऱ अगले दिन बुधवार को विरोध रैली निकाली। जिसमे नगर से अनेक लोग शामिल हुवे जो मन्दिर की इस दुकान को बेचने के पक्ष में नही है। मीटिंग की अध्यक्षता डॉ जेके अरोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता ईश्वरचंद भटनागर, मंदिर ट्रस्ट सदस्य दामोदर कचोलिया, कैलाश जैन एडवोकेट, व्यापार महासंघ अध्यक्ष गिरीश सोमानी, दोनो पूर्व अध्यक्ष प्रितपाल सिंह व राजेश नाहर ने की। इस दौरान दोनो पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश बोहरा व रामलाल गुर्जर, पूर्व नगर कोंग्रेस अध्यक्ष कालूलाल सालेचा, ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन सुदीप सालेचा, पं दीनदयाल उपाध्याय मंच प्रदेशाध्यक्ष नरेश माधवानी, पार्षद सुगना गुर्जर, फूलचंद वर्मा, सतीश पोरवाल, सुरेश धाकड़, कई व्यापारी, प्रदीप शर्मा, सुमित सेठिया, नितिन मालपानी,अशीष लड्ढा, दीपक सोनी,लक्की मारवाड़ी ,पुष्पेंद्र सिंह चौहान म,विवेक जैन (पिंटू), गोपाल पाटीदार, ब्रजमोहन सोनी, ललित गुप्ता, सन्देश पोरवाल, विकास जैन, कपिल भराड़िया, मुकेश जैन और दिलीप सोलंकी आदि समाजसेवी व गणमान्य लोग शामिल हुवे। वही धार्मिक मुद्दा होते हुवे भी हिन्दू संघटनो के कोई भी प्रतिनिधि मीटिंग व रैली में नही दिखे।

केके राठी ने नही उठाया फोन
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष केके राठी ने इस मामले में कुछ दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखते हुवे कहा था कि सालो से दुकान पर किरायेदार जमा हुवा है और किराया बढ़ाने के लिए भी सहमत नही है। कब्जा होने की आशंका थी। इसीलिए मन्दिर के विकास कार्यो व कब्जा हटवाने को लेकर दुकान बेची है। सबकुछ देवस्थान विभाग की प्रक्रिया में तहत नियमानुसार एक को छोड़कर 8 ट्रस्टियों की सहमति से हुवा है। वही दुकान रजिस्ट्री के साथ संलग्न नक्शे में नीलामी से पहले की तारीख में क्रेता और विक्रेता दोनो के नाम व हस्ताक्षर को लेकर सवाल करने के लिए फोन किया तो नही उठाया।

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