50 साल बाद मंदिर को लौटी अपनी जमीन, साढ़े 18 बीघा भूमि फिर हुई श्रीराम मंदिर के नाम

राजस्व रिकॉर्ड की गलती सुधरी, मंदिर की संपत्ति को मिला कानूनी संरक्षण

पचपहाड़ । उपखंड न्यायालय भवानीमंडी ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पचपहाड़ स्थित श्रीराम मंदिर की साढ़े 18 बीघा बहुमूल्य भूमि को पुनः मंदिर के नाम दर्ज करने के आदेश दिए हैं। करीब पांच दशक से अधिक समय से राजस्व अभिलेखों में यह भूमि पुजारी परिवार के नाम दर्ज चली आ रही थी। न्यायालय में लंबे समय से विचाराधीन इस प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और तहसीलदार पचपहाड़ की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तथ्य स्थापित हुआ कि संबंधित भूमि मूल रूप से 'मंदिर श्रीरामजी पचपहाड़' के नाम माफी भूमि के रूप में दर्ज थी। बाद में हुई लिपिकीय त्रुटि के कारण भूमि का नामांतरण पुजारी परिवार के नाम हो गया। मामले की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, जब संबंधित पक्ष ने भूमि को पुनः मंदिर के नाम दर्ज कराने के लिए न्यायालय की शरण ली। इससे पूर्व लोक अदालत ने भी भूमि मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन दूसरे पक्ष द्वारा अपील दायर किए जाने के बाद मामला पुनः उपखंड न्यायालय भवानीमंडी के समक्ष पहुंचा। न्यायालय ने अपने निर्णय में राजस्थान उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि देवता को कानूनन 'शाश्वत नाबालिग' माना गया है तथा उसकी संपत्ति की सुरक्षा करना प्रशासन और न्यायालयों का विधिक दायित्व है। उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे ने 2 जून 2026 को पारित आदेश में भूमि को पुनः 'श्रीराम मंदिर पचपहाड़' के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में इस भूमि के विक्रय, हस्तांतरण अथवा किसी प्रकार के स्वामित्व परिवर्तन पर भी कानूनी प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। न्यायालय के इस फैसले का क्षेत्र के श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि यह निर्णय धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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