चौधरी ने पत्र में बताया कि शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भैसोदा का भवन सर्वे क्रमांक 1384/1 की भूमि पर स्थित है, लेकिन सीमांकन नहीं होने से बाउंड्रीवाल निर्माण में परेशानी आ रही है। विद्यालय परिसर में अतिक्रमण, आवारा मवेशियों की आवाजाही और झाड़ियों के कारण छात्रों में जहरीले जीव-जंतुओं का भय बना रहता है।
उन्होंने उल्लेख किया कि सर्वे क्रमांक 1467 की शिक्षा विभाग की भूमि पर भी सीमांकन के अभाव में अतिक्रमण हो रहे हैं। इसी भूमि पर वर्तमान में शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं सर्वे क्रमांक 1601 एवं 1602 की भूमि, जहां वर्ष 1969 से 1975 तक हायर सेकेंडरी विद्यालय संचालित हुआ था, वर्तमान में अतिक्रमण की आशंका से घिरी हुई है। चौधरी ने वार्ड क्रमांक 8 एवं 9 (मालीपुरा) में शिक्षा विभाग की करीब 3 हेक्टेयर भूमि के संरक्षण की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सुरक्षा और सीमांकन के अभाव में यहां भी अतिक्रमण का खतरा बना हुआ है।
पत्र में जीनिंग प्रेस की भूमि (सर्वे क्रमांक 2316 से 2322) का भी उल्लेख किया गया है। उनका दावा है कि यह भूमि मूलतः लीज प्रावधान के तहत दी गई थी, लेकिन बाद में 11 हितग्राहियों द्वारा क्रय कर ली गई। करोड़ों रुपए मूल्य की इस भूमि की जांच कर आवश्यकता पड़ने पर शासन के अधीन लेने की मांग की गई है।
इसके अलावा विभिन्न कॉलोनियों में पार्क एवं स्लम क्षेत्र की भूमि के विक्रय की जांच कर क्रय-विक्रय दस्तावेज निरस्त करने की मांग भी उठाई गई है। चौधरी ने पत्र में यह भी लिखा कि भैसोदा नगर परिषद जुलाई 2020 में अस्तित्व में आई, जबकि कुछ स्वामित्व प्रमाण पत्र वर्ष 2021 में जारी होना बताए गए हैं। उन्होंने भूमि की प्रकृति (नोइयत) परिवर्तन एवं स्वामित्व संबंधी मामलों की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि गरोठ एसडीएम एवं भानपुरा तहसील न्यायालय के आदेशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हट पाए हैं। ऐसे में संबंधित आदेशों का पालन नहीं होने के कारणों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कलेक्टर से सभी विवादित एवं लोक उपयोगी भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कर जनहित में सुरक्षित कराने की मांग की है।

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