कपिल चौहान, भवानीमंडी | नगर पालिका चुनाव 2026 में टिकट वितरण के साथ ही भवानीमंडी की सियासत में कई चौंकाने वाले समीकरण सामने आए हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और नगर पालिका के तीन बार अध्यक्ष रह चुके कैलाश बोहरा को इस बार पार्षद का टिकट भी नहीं मिल सका। खास बात यह है कि पिछले कार्यकाल में बोहरा नगर पालिकाध्यक्ष रहे, जबकि उनके पुत्र भी पार्षद रह चुके हैं। ऐसे में उनका टिकट कटना शहर की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। बोहरा को कांग्रेस का पुराना और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। पार्टी में उनकी लंबे समय से सक्रियता रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में नगरीय विकास मंत्री रहे शांति धारीवाल से उनकी नजदीकियां भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही हैं। इतना ही नहीं, बोहरा ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी में निकाय चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर आवेदन भी किया था। इसके बावजूद अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम नहीं आया।
अंतिम दिन खुला टिकट का पिटारा
नगर पालिका के 40 वार्डों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकन के अंतिम दिन समय सीमा समाप्त होते ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी की। सूची सामने आते ही चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई। लेकिन इसके साथ ही कई पुराने चेहरों के टिकट कटने से पार्टी के भीतर मायूसी और नए चेहरों को मौका मिलने से उत्साह का माहौल नजर आया।
भाजपा में भी बदले समीकरण
कांग्रेस के साथ भाजपा की सूची को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। भाजपा में भी कई पुराने और दिग्गज चेहरों को टिकट नहीं मिला है। वहीं पूर्व पालिकाध्यक्ष रामलाल गुर्जर के परिवार सहित पार्टी छोड़ने से भी चुनावी समीकरणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
फिलहाल टिकट वितरण ने भवानीमंडी की राजनीति में पुराने समीकरणों को झकझोर दिया है। अब चुनावी मैदान में प्रत्याशियों के साथ-साथ पार्टी से नाराज दावेदारों की भूमिका भी नतीजों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

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