जिसके चलते पूरे दिन 4 से 5 किलोमीटर का लंबा जाम लगा रहता है। प्रतिदिन 50 हजार के करीब लोग इस मार्ग से गुजरते है और लोग 4- 4 घंटो तक जाम मे फंसे रहते है। हालात इतने खराब है कि जाम में फंसे होने के कारण आपातकालीन स्थिति में 5 मरीजो ने हॉस्पिटल पहुंचने से पहले एंबूलेंस में ही दम तोड दिया। कल रीट का पेपर था। करीब 30 से 40 परीक्षार्थी इस जाम के चलते परीक्षा में नही बैठ पाएं। यह उनके भविष्य का प्रश्न है। इतना ही नहीं अपडाउन करने वाले व्यापारी, कर्मचारी, विद्यार्थी रोज परेशान हो रहे है। कोटा और झालावाड के लोग इस समस्या के निराकरण की लगातार मांग कर रहे है। 4 दिन से झाालवाड में लोग ज्ञापन दे रहे है। प्रदशर्न कर रहे है, पर सरकार के कान पर जू नही रेंग रही है। विधायक ने घेरते हुवे कहा कि आपकी डबल इंजन की सरकार है।इसी रोड से एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री का गृह जिला झालावाड है, तो दूसरी तरफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संसदीय क्षेत्र है। इतना ही नही सरकार के दो मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र सांगोद और रामगंजमंडी भी दरा की नाल पर ही मिलते है। फिर भी हजारों लोग घंटो तक जाम में फंसे रहते है। मेरा आपके माध्यम से सरकार से आग्रह है कि इस समस्या के समाधान के लिए अविलंब प्रयास किए जाएं और जब तक टनल या एलिवेटेड रोड नही बन जाएं। तब तक वैकल्पिक प्रबंध करके आमजन को राहत प्रदान की जाए। इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सदन में खडे होकर स्वीकारा कि यह वाकई में अत्यंत गंभीर समस्या है और इसके निराकरण के लिए सरकार ने 46 करोड रूपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। जल्दी ही कार्य चालू होने वाला है। मामले की गंभीरता को देखकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इस सत्र में ऐसा पहला मौका आया है कि किसी स्थगन प्रस्ताव पर सरकार के मंत्री ने जवाब दिया है। इस तरह जवाब देने की व्यवस्था आसन द्वारा हर प्रस्ताव के लिए दी जाए तो और सार्थक बहस हो सकेंगी।
इसी मुद्दे पर पूर्व मंत्री और कोटा उत्तर के विधायक शांती धारीवाल ने सरकार से पूछा कि मंत्री जी जिस दरा की नाल पर सडक चौडी करने की बात कर रहे है और सरकार ने पैसा भी दे दिया। किंतु असलियत में वो हिस्सा रेलवे के अंतर्गत आता है। क्या राज्य सरकार ने उसकी परमिशन रेल्वे से ले ली क्या ? उसके बिना आप कैसे बना दोगे, इस पर सरकार का कोई जवाब नही आया है।

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