भैसोदामण्डी: दिनोदिन भैसोदा नगर में अवैध कॉलोनियों का मायाजाल बढ़ता जा रहा है। पंचायतकाल से अब तक अवैध कॉलोनियों की संख्या कुल 25 है, जिसमे 20 को पिछली सरकार की घोषणा के तहत वैध कर दिया गया है। जबकि नगर की 5 पॉश कॉलोनियां आज तक आपत्ति के चलते अधर में लटकी पड़ी है। बावजूद इसके फिर से नई अवैध कॉलोनियां बसाने की तैयारी है। भूमाफियाओं द्वारा डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी किये बगैर ही प्लाट को आवासीय बताकर बेचते हुवे मोटा मुनाफा कमाने का गोरखधंधा परवान पर है। डायवर्जन व टीएनसी की प्रक्रिया पूर्ण किये बगैर ही धड़ल्ले से अवैध तरीके से प्लाट बेचे जा रहे है। अवैध कॉलोनियों को बसाने वाले आमजन से धोखाधड़ी कर राजस्व को भी मोटा नुकसान पहुँचाया रहे है। भैसोदा तालाब से सटे खसरा क्रमांक- 1446/3 व 1448/2/2/2, 1448/2/2/1 पर अवैध कॉलोनी बसाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। कृषि भूमि पर लाइनिंग डाली जा रही है। अवैध कॉलोनी में निर्माण स्वीकृति नही मिलने पर धोखाधड़ी का शिकार हुवे एक प्लाट मालिक ने मकान बनाना तक शुरू कर दिया है। हालाँकि नगर परिषद व राजस्व विभाग की ओर से प्राथमिक कार्यवाई की गई है। बीते शुक्रवार को नगर परिषद इंजीनियर प्रवीण परमार व पटवारी अरुण पाटीदार ने मौके पर जाकर पंचनामे की कार्यवाई की। सीएमओ गिरीश शर्मा द्वारा भी सम्बंधित खातेदारों को नोटिस जारी कर तलब किया है।
राजस्व विभाग कर रहा रजिस्ट्री, टीएनसी को चूना
सबंधित भूमि के बाजार में प्रोपर्टी दलालों के पास नक्शे तक उपलब्ध है। खातेदारों के आवासीय कॉलोनी के ले आउट- नक्शा के अनुसार भूमि को छोटे- छोटे भूखंडों में विभक्त किया है। जिनकी साइज 1000 से 1200 वर्गफीट है। कुछ भूखंड अन्य साइजों के भी है। स्पष्ट है कि इतनी छोटी साइज की भूमि पर कृषि असंभव है। नक्शे में आवासीय प्रयोजनार्थ आवागमन के लिए मुख्य सडक भी दिखाई गई है। नक्शे पर स्पष्ट तौर पर आवासीय कॉलोनी लिखा गया है। मौके पर चुने की लाइनिंग कर टुकडों में विभक्त किया गया है। जिसका मकसद इस भूमि पर आवासीय कॉलोनी बसाने का स्पष्ट तौर पर प्रमाणित हो रहा है। इस तरह से नगर के आसपास की कृषि भूमियों को डायवर्जन की प्रक्रिया पूर्ण किये बिना ही आवासीय प्रयोजनार्थ भूखंडों में बेचान किया जा रहा है। जिससे खरीददारों के साथ धोखाधडी तो होती ही है वरन उनकी अज्ञानता का लाभ उठाकर भू माफिया उन्हें बिना भूमि का रूपातंरण कराए ही भूमि का बेचान कर देते है। परिणामवस्वरूप ऐसी कॉलोनियों में नगर परिषद द्वारा मूलभूत सुविधाएं नही दी जा सकती है।
खरीदार और शासन के साथ धोखाधडी
किसी भूमि को आवासीय उपयोग में लेने से पूर्व शहरी विकास के अनुकूल टाउन प्लानिंग की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पडता है। भूमि का आवासीय श्रेणी में रूपांतरण के बाद उसका नक्शा स्थानीय निकाय और नगर नियोजक से स्वीकृत होता है। जिसके बाद कॉलोनाइजर को ही सडक, बिजली के खंभे, सार्वजनिक प्रकाश, पार्क, खुला स्थान विकसित करना होता है। जिसके बाद ही वहां मकानों का निर्माण किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को पूरा किए बिना किसी भी कृषि भूमि को इस प्रकार छोटी- छोटी जोतों में विभक्त कर आवासीय प्रयोजन से बेचान करना पूर्ण रूप से गैर कानूनी प्रकिया है। भूखंड खरीदारों को इस प्रकार के भूखंडों का बेचान नकली माल बेचने जैसा अपराध है। न ही इस नक्शे पर आवासीय कॉलोनी जैसे टाइटल का उपयोग किया जा सकता। ऐसा किए जाने पर आईपीसी की धाराओं में प्रकरण दर्ज होना चाहिए।
"पटवारी को मौके पर भेजकर पंचनामा बनवाया है, कार्यवाई कर रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई जाएगी।"
विनोद शर्मा, तहसीलदार भानपुरा


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