वनकर्मियों की मिलीभगत से जंगल छलनी ,वन क्षेत्र में बेरोकटोक चल रहा अवैध खनन

झालावाड डीएफओ की नाक के नीचे महज पांच दस किलोमीटर की दूरी पर सुनियोजित तरीके से वन क्षेत्र को छलनी किया जा रहा है। इनमें जेसीबी, ट्रैक्टर के अलावा इनसे चलने वाली ड्रिल मशानी का प्रयोग कर सेंड स्टोन के बडे स्लैब और चुनाई पत्थर निकाला जा रहा है। झालावाड से कोटा रोड स्थित हाइवे के दोनों ओर सलोतिया और रैन बसेरा साइड के वन क्षेत्र के चारीदीवारी को अवैध खननकर्ताओं ने जगह- जगह से तोड दिया है। यहां से रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर ट्राली वन क्षेत्र में बेरोकटोक प्रवेश करते है। जंगल में ट्रैैक्टरों की आवाजाही के लिए रास्ते बनाए हुए हैं। जिन पर ट्रैक्टरों के टायरों के निशान देखे जा सकते हैं। कोटा रोड पर रेलवे पटरी वाली साइट के जंगल में ही जगह- जगह दर्जनों खदानें चल रही है। जहां दिनभर सेंड स्टोन के चुनाई का पत्थर, चारीदीवारी के काम आने वाले पिल्लर और पट्टियां निकाली जा रही है। दिन में कारीगर इनको तराशकर जमा कर देते हैं। इसके बाद मौका देखकर माल को ट्रैक्टरों से परिवहन किया जा रहा है। जबकि देवरीघाटा नाका कार्यालय यहां से महज तीन चार किलोमीटर ही दूर है। यहां पर नाकेदार सहित पूरा स्टाफ हर महीने इस खनन को रोकने का वेतन लेता है। इतना ही नहीं गिन्दौर नाका क्षेत्र के शहर से सटे मंगलनाथ की डूंगरी और रेलवे पटरी के आसपास का क्षेत्र भी अवैध खनन करने वालों से सुरक्षित नहीं है। गुडा गांवडी के उपर वाले पहाडी इलाके पर भी दर्जनों ट्राली खनन जारी है। \

आकाशवाणी से गिन्दौर सीसी मार्ग के दोनों ओर के वन क्षेत्र में भी बेरोकटोक अवैध खनन जारी है। झालावाड रेंज के इस वन क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए वन विभाग करोडों रूपए चार दीवारी निर्माण में खर्च कर चुका है। लेकिन खनन करने वाले इस चार दीवारी को तोड देते हैं। जिससे बढते मानवीय दखल और बेरोकटोक दौडते ट्रैक्टरों के कारण वन्य जीवों की सुरक्षा को भी खतरा बढ रहा है। यहां नीलगाय, हिरण, जरख सहित अन्य दर्जनों प्रकार के वन्य जीव हैं। जिनकी सुरक्षा खतरे में पडती जा रही है। वन विभाग के अधिकारी हर साल अवैध खनन को रोकने की कार्रवाई भी करते हैं। लेकिन ये कार्रवाई बारिश आने से पहले की जाती है। जबकि पूरे साल बेरोकटोक अवैध खनन चलता रहता है। लेकिन बरसात में खदानों के गड्ढों में पानी भरने से पहले कार्रवाई कर दी जाती है ताकि खनन में भी खलल नहीं पडे और कागजों में दिखाने के लिए कार्रवाई भी हो जाए। मिलीभगत का इससे बडा प्रमाण और क्या होगा।

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