डूडा अधिकारी गरिमा पाटीदार से मिली जानकारी के अनुसार इस अधिनियम के तहत अनाधिकृत कॉलनियो में विकास के लिए खर्च होने वाली कुल राशि का 50% जनता से वसूलने और बाकी राशि सरकारी धन से खर्च करने का नियम है। वही कॉलोनाईजर पर एफआईआर से लेकर उस कॉलोनी में उसके नाम बची हुई शेष जमीनों को अधिग्रहण करने का प्रावधान भी है। जरूरत पड़ने पर उसके नाम बोल रही जमीनों की सरकारी नीलामी कर वसूली भी की जा सकती है। वही अगर कोई व्यक्ति विकास शुल्क एक साथ देने में सक्षम नही है, तो किश्तों में लिया जा सकता है। पर जमीनी स्थितियां नियमो के बिल्कुल उलट है। अधिकारी- कर्मचारी धोखाधड़ी का शिकार हुवे लोगो से विकास के नाम पर शुल्क वसूलने में सख्ती बरत रहे, पर सरकारी धन को चपत लगाने वाले गुनहगार कॉलोनाईजर पर कार्यवाई करने में चुप्पी साधे है। इससे सरकारी सिस्टम की जमीनी हकीकत उजागर हो रही है। यह नियम जनहित से ज्यादा कॉलोनाईजर हित के पूरक होता दिख रहा है। अफसर और पुलिस इन रसूखदार पेशेवर कॉलोनाईजर के खिलाफ तो कार्यवाई करने की हिम्मत तक नही जुटा पा रहे।
जबकि इस धोखाधड़ी का शिकार हुई भोलीभाली जनता को नियम कायदे गिनाने में कोई कसर नही छोड़ रहे। भैसोदा नगर में कुल 25 ऐसी कॉलोनियों है, जिनको नगर परिषद ने चिन्हित कर अनाधिकृत घोषित किया। अब उनमें विकास कार्य करवाने की योजना है। जिसकी एवज में जनता से विकास शुल्क वसूला जा रहा है। सख्ती इतनी कि भारी भरकम विकास शुल्क जमा कराने के बाद भी भवन निर्माण, नल कनेक्शन व नामन्तरण की अनुमति के लिए लोग नप के चक्कर लगा रहे है। दूसरी ओर कॉलोनाईजर को खुली छूट दी जा रही है। हद तो तब हो गई जब नगर के नक्शों में सार्वजनिक उपयोग की भूमियों को दर्शाया तक नही गया। ऐसा करके जनउपयोग के लिए आरक्षित भूमियों को भी बेचने का खुला मौका सरकारी नुमाइंदों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से दिया जा रहा है। जबकि कुछ तो इनमें से पूर्व में ही बिक चुकी है और बाकी बची हुई बिकने की कगार पर है। नियमो की अपने तरीके से व्याख्या कर जनहित का हवाला देते हुवे किस तरह से सार्वजनिक हित के क्षेत्रो को समाप्त किया जा रहा है, यह सोचनीय है।
नए नक्शों में कई पार्क गायब, बस स्टैंड को भी सड़क दिखाया
नए नियम 2021 के अनुसार नगर की अनाधिकृत कॉलनियो के लिए बनाए नए नक्शों में कई पार्कों, सार्वजनिक उपयोग की स्थानों को अन्य रूप में दर्शाया गया, जैसे बस स्टैंड को नक्शे में सड़क दिखाया गया और पार्कों के लिए आरक्षित बची हुई भूमियों को ओपन स्पेस, ओपन प्लाटिंग आदि अंकित किया। बता दे कि भैसोदामण्डी की अधिकतर कॉलनियो के नक्शे टीएनसीपी से स्वीकृत है। हैंडओवर नही करने की वजह बताकर इनको भी अनाधिकृत की श्रेणी में ले लिया गया। पर आज तक इन कॉलनियो में टीएनसीपी के नक्शानुसार आरक्षित की गई सार्वजनिक भूमिया यथा स्थिति है। वे सब आज भी मूल कॉलोनाईजर के नाम ही बोल रही है। जिस कारण उनके बिकने का डर बना हुवा है और तैयार किये गए नए नक्शों में भी उनको सार्वजनिक उपयोग के लिए नही दर्शाने से उनके संरक्षण पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे है।
पूर्व सरपंच व लोक निर्माण सभापति प्रतिनिधि ने लगाई आपत्ति
नगर की अनाधिकृत कॉलनियो के लिए नप द्वारा प्राइवेट कंसल्टेंसी एचडी इंजीनियरिंग से तैयार करवाये गए नए नक्शों में हेरफेर व त्रुटि को लेकर लोक निर्माण सभापति प्रतिनिधि व पूर्व सरपंच श्याम गुर्जर ने आपत्ति दर्ज कराई है, आपत्ति में सार्वजनिक उपयोग की भूमियों को स्पष्ठ रूप से अंकित नही करने का दावा किया गया है। जिसकी सुनवाई जल्द ही एसडीएम कोर्ट में कई जाएगी। उनका कहना है कि सार्वजनिक हित की जमीन जैसे पार्क, खुली भूमिया आदि कॉलोनाईजर के नाम हो दर्ज होने से कभी भी बिक सकती है। जिसके सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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